श्राद्ध कर्म करना क्यों जरूरी है?
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श्राद्ध कर्म करना क्यों जरूरी है?
जैसे यदि आप भूखे या प्यासे ही सो जाते हैं तो सपने में आप पानी कितना ही पी लें लेकिन तृप्ति नहीं होती, यदि आपको नींद में पेशाब आ रही है तो आपको बाथरूप का सपना आएगा और आप करने के बाद भी संतुष्ट नहीं होंगे। इसी प्रकार मनुष्य जब मर जाता है तो उसकी अवस्था भी प्रारंभ में सपने देखने जैसी हो जाती है। सूक्ष्म शरीर ही सपने देखता है।
जब कोई आत्मा अपना शरीर छोड़कर चला जाता है तब उसके सारे क्रियाकर्म करना जरूरी होता है, क्योंकि प्रत्येक आत्मा को भोजन, पानी और मन की शांति की जरूरत होती है और उसकी यह पूर्ति सिर्फ उसके परिजन ही कर सकते हैं। अन्न से शरीर तृप्त होता है। अग्नि को दान किए गए अन्न से सूक्ष्म शरीर (आत्मा का शरीर) और मन तृप्त होता है। इसी अग्निहोत्र से आकाश मंडल के समस्त पक्षी भी तृप्त होते हैं। तर्पण, पिंडदान और धूप देने से आत्मा की तृप्ति होती है। तृप्त आत्माएं ही प्रेत नहीं बनतीं।