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शनि देव को क्यों चढ़ाया जाता है तेल? जानकर हो जाएंगे हैरान

Fri, 13 Dec 2019 03:56 PM IST
योगेश जोशी धर्म डेस्क, अमर उजाला
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शनि को कर्म फलदाता कहा जाता है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि को कर्म फलदाता कहा जाता है। शनि व्यक्ति के कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। शनिवार को शनि देव पर तेल चढ़ाया जाता है। आइए, आज हम आपको बताते हैं शनि देव और तेल का क्या संबंध है। शनि देव को तेल चढ़ाने के पीछे 2 पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।
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संपूर्ण लंका के जलने से सारे ग्रह आजाद हो गए परंतु शनिदेव उलटे लटके हुए थे जिस कारण शनि देव आजाद नहीं हो पाए - फोटो : social media
पहली कथा- इस कथा का संबंध है रावण से
  • धार्मिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि रावण ने अपने बल से सभी ग्रहों को बंदी बना रखा था। शनिदेव को रावण ने अपने अहंकार में चूर होकर बंदीग्रह में उलटा लटका दिया था। उसी समय हनुमानजी माता सीता की खोज में प्रभु श्री राम के दूत बनकर लंका गए हुए थे। रावण ने जब हनुमाजी की पूंछ में आग लगाई थी तब हनुमानजी ने पूरी लंका जला दी थी।
  • संपूर्ण लंका के जलने से सारे ग्रह आजाद हो गए परंतु शनिदेव उलटे लटके हुए थे जिस कारण शनि देव आजाद नहीं हो पाए और उल्टा लटके होने के कारण उनके शरीर में बहुत पीड़ा हो रही थी और वह दर्द से परेशान हो रहे थे।
  • शनि की इस पीड़ा को शांत करने के लिए हुनमानजी ने उनके शरीर पर तेल से मालिश की और शनि को दर्द से मुक्त किया था। तब शनि देव ने कहा जो भी व्यक्ति श्रद्धा भक्ति से मुझ पर तेल चढ़ाएगा उसे सारी समस्याओं से मुक्ति मिल जाएगी। तभी से शनिदेव पर तेल चढ़ाने की परंपरा प्रारंभ हुई।
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भगवान हनुमान जी ने शनिदेव को बहुत समझाया और युद्ध के लिए तैयार नहीं हुए - फोटो : अमर उजाला
दूसरी कथा शनिदेव और हनुमानजी में हुआ था युद्ध
  • धार्मिक कथाओं के अनुसार एक बार शनि देव को अपने बल और पराक्रम पर घमंड होने लगा था और वो खुद को सबसे अधिक शक्तिशाली समझने लगे थे। इसी अहंकार और घमंड में शनि देव हनुमानजी से युद्ध करने चले गए। शनि देव हनुमान जी को हरा यह साबित करना चाहते थे की उनसे अधिक शक्तिशाली इस दुनिया में कोई नहीं है। 
  • जब शनि देव भगवान हनुमान जी के पास गए तो हनुमान जी एक शांत स्थान पर बैठकर अपने स्वामी श्रीराम की भक्ति में लीन थे। शनिदेव हनुमान जी से मिलते ही उनसे युद्ध करने के लिए तैयार हो गए। भगवान हनुमान जी ने शनिदेव को बहुत समझाया और युद्ध के लिए तैयार नहीं हुए। लेकिन शनिदेव तो अहंकार में चूर थे उन्होंने हनुमान जी की एक न सुनी और युद्ध के लिए अड़ गए।
  • जब बहुत बार मना करने पर भी शनि देव नहीं माने तो भगवान हनुमान जी और शनिदेव के बीच युद्ध शुरू हुआ। युद्ध में शनिदेव बुरी तरह हारकर घायल हो गए और उनके शरीर में भयंकर पीड़ा होने लगी। तब हनुमान जी उनकी पीड़ा तेल लगाकर कम की। इसी कारण शनिदेव पर तेल चढ़ाया जाता है। शनिदेव ने कहा की जो भी मनुष्य मुझे सच्चे मन से तेल चढ़ाएगा, मैं उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करूंगा।














 
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