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हिंदू धर्म में क्यों किया जाता है कर्णभेदन संस्कार, जानिए महत्व और इसकी पूरी विधि

Tue, 16 Feb 2021 11:29 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pexels.com
हिंदू धर्म में किए जाने वाले 16 संस्कारों में से कर्णभेदन नौवां संस्कार है। कर्ण भेदन यानि कान छेदना या कान भेदन करना। इस संस्कार में बच्चे के कान को छिदवाया जाता है और सोने या चांदी एक सुनहरा तार पहना दिया जाता है। इसके साथ ही बालक  के कल्याण और आने वाले जीवन की शुभ कामना के लिए मंत्रों का जाप किया जाता है। सनातन धर्म में हर कार्य के लिए दिन तिथि और मुहूर्त का बहुत ध्यान रखा जाता है। इसी तरह से कर्णभेदन संस्कार के लिए आपको मुहूर्त और विधि-विधान का ध्यान रखना चाहिए। तो चलिए जानते हैं कर्ण भेदन संस्कार का महत्व, विधि और समय...
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ear - फोटो : pixa
किस आयु में किया जाता है कर्णभेदन 
शिशु के जन्म के बाद 12वें,13वें दिन या फिर बच्चे के 6 या 7 माह के हो जाने के बाद कर्णभेदन संस्कार करवाया जा सकता है। इसके अलावा जब बच्चा 5वें या 7वें वर्ष में होता तब भी कर्णभेदन संस्कार किया जा सकता है। कर्णभेदन संस्कार के लिए शुभ मूहूर्त की जानकारी के लिए किसी योग्य ज्योतिष से सलाह ले लेनी चाहिए।
 
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
कर्णवेधन संस्कार का महत्व
शास्त्रों के अनुसार,  जिसका कर्णवेध संस्कार नहीं किया जाता है, वह अपने रिश्तेदारों के अंतिम संस्कार का अधिकारी नहीं माना जाता है। शिशु की बौद्धिक उन्नति और शैक्षणिक विकास के लिए उपनयन संस्कार से पहले कर्णवेधन संस्कार करवाया जाता है।  माना जाता है कि कर्णभेदन संस्कार से बच्चे की जीवन में आने वाली नकारात्मकता और समस्याएं दूर होती हैं।
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
कैसे करना चाहिए कर्णवेधन संस्कार
  • कर्णभेदन संस्कार के लिए किसी मंदिर या घर में ही पवित्र स्थान को चुनना चाहिए।
  • जहां कर्णवेधन संस्कार पूर्ण किया जाना है, उस स्थान को अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए। 
  • उस स्थान के वातावरण को शुद्ध करने के लिए गंगाजल छिड़कना चाहिए। 
  • उसके बाद बच्चे को स्नानादि कराकर नए और साफ-सुथरे कपड़े पहनाएं।
  • कर्णभेदन संस्कार समारोह को आरंभ करने से पहले, देवी और देवताओं का आवाहन करना चाहिए। इसके लिए किसी पुरोहित की सहायता ले सकते हैं।
  • कर्णभेदन संस्कार के लिए बालक के माता पिता को सूर्य की दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।
  • इसके बाद कर्णभेदन संस्कार का कार्य पूर्ण करवाना चाहिए। 
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