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Sawan 2025: शिवलिंग की पूजा करते समय किस दिशा में होना चाहिए मुख, जानें सही नियम

Mon, 30 Jun 2025 12:01 PM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शिवलिंग की पूजा करते समय कुछ नियमों का पालन करना भी बेहद जरूरी होता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शिवलिंग की पूजा करते समय कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। माना जाता है कि इससे पूजा का प्रभाव बढ़ता है।
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शिवलिंग की पूजा के लिए सही दिशा - फोटो : adobe stock
Sawan 2025: कुछ ही दिनों में सावन का महीना शुरू होने वाला है। इस दौरान शिव भक्त विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं, लेकिन शिवलिंग की पूजा करते समय कुछ नियमों का पालन करना भी बेहद जरूरी होता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शिवलिंग की पूजा करते समय कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। माना जाता है कि इससे पूजा का प्रभाव बढ़ता है।

शिवलिंग की पूजा के लिए सही दिशा
शिवपुराण और अन्य धर्मग्रंथों में पूजा की दिशा को लेकर विस्तार से जानकारी दी गई है। इन ग्रंथों के अनुसार शिवलिंग की पूजा करते समय उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजन करना सबसे उत्तम माना गया है। यदि कोई भक्त पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करता है, तो वह शिवलिंग के मुख्य भाग को बाधित करता है, जिससे पूजा का फल कम हो सकता है।
 

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शिवलिंग की पूजा के लिए सही दिशा - फोटो : adobe stock
जब कोई उत्तर दिशा की ओर मुख कर पूजा करता है, तो वह भगवान शिव के बाईं ओर होता है, जिसे माता पार्वती का स्थान माना जाता है। इसलिए इस स्थिति में पूजा करना अपूर्ण माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि शिव और शक्ति का एक रूप में पूजन होना चाहिए, तभी वह फलदायी होता है।
 

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शिवलिंग की पूजा के लिए सही दिशा - फोटो : adobe stock
सबसे उत्तम स्थिति यह मानी जाती है कि भक्त दक्षिण दिशा की ओर बैठकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा करे। इस स्थिति में भक्त शिवलिंग के सामने होता है और पूजा दोष रहित मानी जाती है। 
 

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उत्तर दिशा का धार्मिक महत्व - फोटो : adobe stock
उत्तर दिशा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उत्तर दिशा को देवों और ऋषि-मुनियों की दिशा माना गया है, जबकि दक्षिण दिशा पितरों की, पूर्व देवी-देवताओं की और पश्चिम मानवों की दिशा मानी जाती है। स्कंद पुराण में भी उत्तर दिशा की विशेषता का उल्लेख किया गया है।
 

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उत्तर दिशा का धार्मिक महत्व - फोटो : adobe stock
सावन में यदि भक्त शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, दूध या शहद अर्पित करते हैं और उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा करते हैं, तो उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और शिव-शक्ति दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।


 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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