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Rohini Vrat 2026: फरवरी में कब है रोहिणी व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Tue, 10 Feb 2026 11:21 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Rohini Vrat 2026: रोहिणी व्रत भगवान वासुपूज्य स्वामी को समर्पित एक महत्वपूर्ण धार्मिक व्रत है, जिसे हर महीने रोहिणी नक्षत्र में श्रद्धा और नियमों के साथ रखा जाता है। यह व्रत संयम, तप और आत्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। फरवरी 2026 में रोहिणी व्रत की सही तिथि, शुभ समय और पूजा की विधि जानकर भक्त इस व्रत को विधिपूर्वक संपन्न कर सकते हैं और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
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रोहिणी व्रत 2026 - फोटो : amar ujala
Rohini Vrat February 2026 Date and Shubh Muhurat: हिंदू पंचांग के अनुसार फरवरी और मार्च के बीच आने वाला समय फाल्गुन माह कहलाता है, जिसे सनातन धर्म में अत्यंत शुभ माना गया है। यह माह धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से खास होता है। फाल्गुन महीने में कई प्रमुख पर्व और व्रत आते हैं, जिनमें महाशिवरात्रि का विशेष स्थान है। यह पावन पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है, जिस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर विधि-विधान से शिव-पार्वती की पूजा करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
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फाल्गुन माह में पड़ने वाले महत्वपूर्ण व्रतों में रोहिणी व्रत भी शामिल है, जिसे हर महीने रोहिणी नक्षत्र में आने वाली तिथि को रखा जाता है। यह व्रत जैन धर्म में विशेष महत्व रखता है और भगवान वासुपूज्य स्वामी को समर्पित माना जाता है। इस दिन जैन श्रद्धालु भक्ति और संयम के साथ भगवान वासुपूज्य की आराधना करते हैं। फरवरी माह में रोहिणी व्रत किस दिन रखा जाएगा, इसका शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, पूजा विधि कैसे करें और इस व्रत का धार्मिक महत्व क्या है, इन सभी बातों को आगे विस्तार से समझते हैं।
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 रोहिणी व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त - फोटो : adobe stock
 रोहिणी व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर रोहिणी व्रत रखा जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत 25 फरवरी को पड़ेगा। इस दिन रोहिणी नक्षत्र का शुभ संयोग दोपहर 1 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालु अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार रोहिणी नक्षत्र के समय भगवान वासुपूज्य स्वामी की पूजा-अर्चना कर सकते हैं, जिससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
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रोहिणी व्रत की पूजा विधि  - फोटो : adobe stock
रोहिणी व्रत की पूजा विधि 
रोहिणी व्रत के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की साफ-सफाई करना शुभ माना जाता है। इसके बाद नित्य कर्मों से निवृत्त होकर गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करें और शुद्ध वस्त्र धारण करें। स्नान के पश्चात आचमन कर व्रत का संकल्प लें और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ भगवान वासुपूज्य स्वामी की पूजा करें। पूजा के दौरान उन्हें फल, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। अंत में आरती कर भगवान से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
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रोहिणी व्रत का महत्व - फोटो : adobe stock
रोहिणी व्रत का महत्व
रोहिणी व्रत जैन धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इस दिन जैन मंदिरों में विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि विवाहित महिलाएं इस व्रत को परिवार की सुख-समृद्धि और सौभाग्य के लिए रखती हैं, वहीं अविवाहित कन्याएं भी मनोकामना पूर्ति के लिए यह व्रत करती हैं। जैन परंपरा के अनुसार रोहिणी व्रत करने से भगवान वासुपूज्य स्वामी की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख, शांति व समृद्धि का वास होता है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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