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Mantra: ओवरथिंकिंग और एंजाइटी को कम करने के लिए रोज करें इन मंत्रों का जाप

Fri, 06 Feb 2026 03:26 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Mantra For Overthinking And Anxiety: रोजाना इन सरल मंत्रों का जाप करने से ओवरथिंकिंग और एंजाइटी कम हो सकती है। साथ ही आपके जीवन में सकारात्मकता बढ़ सकती है
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Mantra For Overthinking And Anxiety - फोटो : अमर उजाला
Mantra For Overthinking And Anxiety: आज लगभग हर तीसरा व्यक्ति किसी न किसी मानसिक दबाव से गुजर रहा है। तेज रफ्तार दिनचर्या, बढ़ती जिम्मेदारियां और लगातार चलने वाली चिंताएं मन को थका देती हैं। ऐसे में ओवर-थिंकिंग और एंजाइटी मानो जीवन का सामान्य हिस्सा बन चुके हैं। इन मानसिक उलझनों का असर सीधा हमारे काम, व्यवहार और निर्णय लेने की क्षमता पर पड़ता है। यही नहीं इन सभी का प्रभाव व्यक्ति के कार्यों पर भी पड़ता है, जिस कारण कई तरह की समस्याएं आने लगती हैं। हालांकि, मन को शांत और संतुलित रखने के लिए हमारे धार्मिक ग्रंथों में कुछ सरल और प्रभावी उपाय बताए गए हैं। विशेष रूप से कुछ मंत्रों का नियमित जाप मानसिक तनाव को कम करने, नकारात्मक विचारों को दूर करने और भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने में बेहद सहायक माना गया है। मान्यता है कि, अगर नियमित रूप से इन मंत्रों का जाप किया जाए, तो व्यक्ति का मन स्थिर होता है और उसकी एकाग्रता क्षमता भी बढ़ती है। ऐसे में आइए इन मंत्रों को जानते हैं।
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Mantra For Overthinking And Anxiety - फोटो : adobe
महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।

कहते हैं कि, महादेव के महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से मन में चल रही नकारात्मकता दूर होती हैं और व्यक्ति प्रसन्न महसूस करता है।
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Mantra For Overthinking And Anxiety - फोटो : adobe stock
ओम नमो भगवते हनुमते नम:
ओम हं हनुमते नम:
ओम हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट


हनुमान जी के इन मंत्रों का स्मरण करने से मन से सभी तरह के डर समाप्त होते हैं। 

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Mantra For Overthinking And Anxiety - फोटो : Adobe Stock
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

 सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

ॐ जटा जूट समायुक्तमर्धेंन्दु कृत लक्षणाम|
लोचनत्रय संयुक्तां पद्मेन्दुसद्यशाननाम॥


इन मंत्रों के जाप से आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्ति स्वयं को मजबूत महसूस करता है।
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Mantra For Overthinking And Anxiety - फोटो : amar ujala

मन को शांत और स्थिर रखने के लिए अवश्य करें हनुमान चालीसा का पाठ

हनुमान चालीसा Hanuman Chalisa

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज निजमनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।। कंचन वरन विराज सुवेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै। शंकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग वन्दन।।

विद्यावान गुणी अति चातुर।राम काज करिबे को आतुर।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा।। भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।। सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा। नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कवि कोविद कहि सके कहाँ ते।। तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र विभीषन माना। लंकेश्वर भये सब जग जाना।। जुग सहस्र योजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।। दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।। सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना।।

आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।। भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।। संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम वचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा। तिनके काज सकल तुम साजा। और मनोरथ जो कोई लावै।सोई अमित जीवन फल पावै।।

चारों युग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।। साधु-संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस वर दीन जानकी माता।। राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को भावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै।। अन्त काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेई सर्व सुख करई।। संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।। जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहिं बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।। तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा।।

दोहा 
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): 
यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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