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नारद पुराण के अनुसार व्यभिचार की क्या सजा मिलती है परलोक में

Sat, 28 Jan 2017 11:41 AM IST
राकेश्ा झा/ टीम डिजिटल, नई दिल्ली।
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व्‍यभ‌िचार
धरती पर जब से मैथुनी सृष्ट‌ि की व्यवस्‍था हुई तब से ही मनुष्य के अंदर काम और वासना ने अपना स्‍थान बना ल‌िया। ज‌िस व्यक्त‌ि ने इन पर न‌ियंत्रण नहीं रखा उनके कदम बहक गए और रूप के जाल में फंसकर परस्‍त्री और पुरूष के साथ संबंध बना ल‌िए। इस बात से न स‌िर्फ मनुष्य, बल्क‌ि ज्ञानी ऋष‌ि मुन‌ि और देवता भी बच न सके। इसल‌िए ईश्वर ने इस पाप कर्म से बचने के ल‌िए कुछ न‌ियम बनाए और इसकी सजा तय की ज‌िसका उल्लेख पुराणों में म‌िलता है। नारद पुराण में जीवनसाथी को धोखा देकर परायी स्‍त्री या पराये पुरुष से संबंध रखने की ऐसी सजा है परलोक में जानकर कांप जाएंगे।
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नारद पुराण के अनुसार व्यभ‌िचार की क्या सजा म‌िलती है परलोक में

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yamraj - फोटो : AmarUjala
भगवान व‌िष्‍णु के परम भक्त नारदमुन‌ि ने परलोक में पाप‌ियों को जो सजा म‌िलती है उसका उल्लेख करते हुए नारद पुराण में व‌िस्तार से ल‌िखा है। नारद मुन‌ि बताते हैं धर्मराज और महाराज भगीरथ के बीच लोक परलोक की चर्चा हो रही थी। भगवान राम के पूर्वज भगीरथ जी धर्मराज से पूछते हैं क‌ि यमलोक में पाप‌ियों को क‌िस कर्म की क्या सजा म‌िलती है। इस प्रश्न का जवाब देते हुए धर्मराज बताते हैं क‌ि व्यभ‌िचार‌ियों यानी परस्‍त्री पुरुष से संबंध रखने वाले को म‌िलने वाली सजा का भी ज‌िक्र करते हैं।
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यमराज
धर्मराज कहते हैं जो पुरुष काम वासना से अपने को रोक नहीं पाते हैं और परायी स्‍त्र‌ियों के मोह में फंसकर उनके साथ संबंध बनाते हैं उनके ल‌िए यमलोक में बहुत ही कष्टकारी सजा का व‌िधान है। मृत्यु के बाद ऐसे पुरुषों को यमलोक उसी स्‍त्री के दर्शन होते हैं ज‌िनके मोह में फंसकर व्यभ‌िचार कर बैठते हैं लेक‌िन उस स्‍त्री को देखकर पापी पुरुष भागता फ‌िरता है।

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दरअसल स्‍त्री तपाए हुए तांबे के समान होती है और पापी पुरुष के साथ संबंध बनाने के ल‌िए दौरती हुई आती है। इसे देखकर पापी भागता है लेक‌िन स्‍त्री के तांबे का शरीर उसे आल‌िंगन करके बारी-बारी से अलग-अलग नर्कों में ले जाता है और पापी पुरुष को युगों तक अपने पाप कर्म का दंड भोगना पड़ता है।
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relationship
इसी तरह अपने पत‌ि को धोखा देकर जो स्‍त्री पराये पुरुष से संबंध रखती है उनके ल‌िए भी यमलोक में बड़ा भारी दंड का व‌िधान है। व्यभ‌िचार‌ी स्‍त्र‌ियों को देखकर यमराज का चेहरा उग्र हो जाता है और उसे रुह कंपाने वाली सजा देते हुए नर्क में भेजते हैं। ऐसी स्‍त्र‌ियों को यमलोक में लाहे के जलते पुरुष द‌िखते हैं ज‌िनकी सूरत उस पुरुष की तरह होती है ज‌िनसे उनका अनैत‌िक संबंध होता है।
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relationship
लोहे के दहकते पुरुष स्‍त्री को जबरदस्ती अपने आल‌िंगन में लेकर उनसे उसी प्रकार व्यवहार करते हैं जैसा वह अपने प्रेमी से चाहती थी। इसे स्‍थ‌ित‌ि तड़पती है लेक‌िन उसकी सहायता कोई नहीं करता इसके बाद दहकते लोहे के खंभों का उन्हें आल‌िंगन करवाया जाता है।
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यमराज
यमराज का दंड यहां भी खत्म नहीं होता है व्यभ‌िचारी स्‍त्री को नमक के पानी से स्नान करवाया जाता है और नमक वाला पानी प‌ीने के ल‌िए भी द‌िया जाता है। इससे वह छटपटती है। इसके बाद बारी-बारी से व‌िभ‌िन्न नर्कों का फल भोगकर पशुओं के रूप में जन्म लेती है। व्यभ‌िचारी पुरुषों को भी पशु योनी में भी नीच योनी प्राप्त होती है।
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