प्रतीकात्मक तस्वीर
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मूल नक्षत्र में जन्में जातक का स्वभाव
यदि किसी जातक का जन्म मूल नक्षत्र में हुआ है लेकिन उसका शुभ प्रभाव है तो ऐसे बालक अन्य की तुलना में अलग विचारों के होते हैं। ये तेजस्वी, यशस्वी होते हैं परंतु यदि वह अशुभ प्रभाव में हो तो इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला बालक क्रोधी और ईर्ष्यालु स्वाभाव का होता है। इसके साथ ही ऐसे जातकों की सेहत भी अच्छी नहीं होती है। मूल नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु है तो वहीं राशि स्वामी गुरु है, इसलिए इस नक्षत्र में जन्में जातको पर जीवन भर गुरु और केतु दोनों का प्रभाव रहता है। यदि केतु नकरात्मकता को जन्म देता है तो गुरु के कारण जीवन में सकारात्मकता का आगमन होता है। इस नक्षत्र में जन्में जातक कठिन से कठिन लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भी अपनी पूरी ऊर्जा लगा देते हैं। ये लोग दृढ़ विचारों वाले होते हैं और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करके रखते हैं।