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भगवान शिव की पूजा में भूलकर भी न चढ़ाएं ये चीजें, मानी गई हैं वर्जित

Tue, 23 Jun 2020 08:54 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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भगवान शिव की पूजा बहुत ही सरल होती है
भगवान शिव बहुत ही भोले हैं वे सिर्फ भक्त के भाव के भूखे हैं अगर कोई भक्त सच्चे मन से उन्हें कुछ भी अर्पित कर देता है तो वे अति शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिए तो उन्हें भोलेनाथ भी कहा जाता है। परन्तु कुछ ऐसी वस्तुएं भी हैं जो शिव की पूजा में वर्जित मानी गई है। हमें इन चीजों को भगवान शिव को कभी भूलकर भी अर्पित नहीं करना चाहिए।

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केतकी का फूल शिव को कभी भूलकर भी अर्पित न करें। यह शिव की पूजा में पूर्णतया वर्जित है। पौराणिक कथा के अनुसार एक बार जब भगवान शिव नें ब्रह्मा और विष्णु को ज्योतिर्लिंग का सिरा और अंत ढूंढने को कहा था। तब ब्रह्मा जी ने शिव से झूठ कहा था कि उन्होंने लिंग का अंत ढूंढ लिया है। और केतकी के फूल को साक्षी बनाया था। इसी झूठ से रूष्ट होकर भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा में वर्जित कर दिया था।
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lord shiva
शंखचूड़ नाम का एक दैत्य था। जिसके अत्याचारों से सभी देवता परेशान थे। भगवान शिव ने अपने त्रिशुल से उस राक्षस का वध किया था। जिसकी भस्म से शंख की उत्पत्ति हुई। इसलिए शिव जी को शंख से जल नहीं चढ़ाया जाता है।

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तुलसी के पत्तों को औषधिय गुणों से भरपूर माना जाता है। इन्हें बहुत ही पवित्र माना गया है इसलिए तुलसी को पूजा जाता हैं लेकिन शिव जी को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती है। तुलसी के पति जांलधर जो एक असुर था, भगवान शिव ने उसका अंत किया था जिसके कारण तुलसी ने शिव जी को अपने औषधिय गुणों से उन्हें वंचित कर दिया।
 
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कुमकुम या सिंदूर सुहाग की निशानी होता है। इसलिए सिंदूर माता पार्वती को अर्पित कर सकते हैं लेकिन भगवान शिव को चंदन या भस्म का टीका लगाना चाहिए। भगवान शिव को सिंदूर न चढ़ाने का एक कारण यह भी माना जाता है कि शिव विनाशक हैं। जबकि स्त्रियां अपने पति की लंभी आयु के लिए भगवान को सिंदूर अर्पित करती हैं।
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हल्दी को शुभ माना जाता है और सभी पूजा पाठ के कामों में हल्दी का प्रयोग किया जाता है, और हल्दी को सौन्दर्य का प्रतीक भी माना गया है। जबकि भगवान शिव बैरागी हैं। इसलिए शिव की पूजा या अभिषेक में हल्दी का प्रयोग नहीं किया जाता है।
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शिवलिंग पर नारियल को चढ़ाया जा सकता है लेकिन नारियल के जल से शिवलिंग का अभिषेक नहीं करते हैं क्योंकि हम जो भी वस्तु अर्पित करते हैं उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं जबकि अभिषेक किए गए पदार्थों का सेवन नहीं किया जाता है। इसलिए नारियल के पानी से शिव का अभिषेक नहीं किया जाता है।
 
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