भगवान शिव पंचमुख स्वरूप
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पंचमुख के पंचकृत्य
शिव पुराण में भगवान शिव कहते हैं, “सृष्टि, पालन, संहार, तिरोभाव और अनुग्रह, ये पांच कृत्य (कार्य) मेरे पांचों मुखों द्वारा धारित हैं।” इस बात से स्पष्ट होता है कि भगवान शिव की पांच विशिष्ट मूर्तियां (मुख) विभिन्न कल्पों में लिए गए उनके अवतार हैं। माना गया है कि जगत के कल्याण की कामना से भगवान सदाशिव के विभिन्न कल्पों में अनेक अवतार हुए, जिनमें से सद्योजात, वामदेव, तत्पुरुष, अघोर और ईशान अवतार प्रमुख हैं। ये ही भगवान शिव की पांच विशिष्ट मूर्तियां (मुख) हैं। अपने पांच मुख रूपी विशिष्ट मूर्तियों का रहस्य माता अन्नपूर्णा को बताते हुए भगवान शिव कहते हैं, “ब्रह्मा मेरे अनुपम भक्त हैं। उनकी भक्ति के कारण मैं प्रत्येक कल्प में दर्शन देकर उनकी समस्या का समाधान किया करता हूं।”