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ईद के मौके पर जानिए, मीना में शैतान को पत्थर मारने की परंपरा क्यों है?

Fri, 08 Jul 2016 10:10 AM IST
रामीश सिद्दीकी
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मीना
दुन‌िया भर में मौजूद हर मुसलमान यह ख्वाह‌िश रखता है क‌ि अपने जीवन में वह कम से कम एक बार हज पर जाए और पाक काबा की तवाफ करे। ले‌क‌िन बीते कुछ सालों में हज यात्रा के दौरान मक्का मदीना में कई हादसे हुए हैं और इनमें मीना में शैतान के स्तंभ को पत्‍थर मारने की परंपरा में मचे भगदड़ की बड़ी भूम‌िका रही है। तो आइये जानें क‌ि इस परंपरा के पीछे क्या मकसद और व‌िश्वास है।
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ईद के मौके पर जान‌िए मदीना में शैतान को पत्‍थर मारने की परंपरा क्यों है?

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इस्लाम‌िक व‌िषयों के जानकार रामीश स‌िद्द‌ीकी बताते हैं क‌ि यह परंपरा हजारों साल पहले शुरु हुई थी। ज‌िस प्रकार बकरीद में प्रतीकात्मक रुप में बकरे की कुर्बानी दी जाती है उसी तरह मीना में शैतान को पत्‍थर मारने की प्रत‌ीकात्मक परंपरा है।
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इस परंपरा के पीछे हजरात इब्राह‌िम और उनके बेटे इस्माइल की कहानी है। हजरत इब्राह‌िम से जब अल्लाह ने उनके बेटे की कुर्बानी मांगी तो उन्होंने अपने बेटे को कुर्बान करने के फैसला क‌िया।

ईद के मौके पर जान‌िए मदीना में शैतान को पत्‍थर मारने की परंपरा क्यों है?

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जहां पर हजरत साहब ने शैतान को पत्‍थर मारा था वहां एक स्तंभ है ज‌िसे शैतान मानकर आज भी उसी परंपरा को न‌िभाने के ल‌िए तीर्थयात्री पत्‍थर मारते हैं।
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ईद के मौके पर जान‌िए मदीना में शैतान को पत्‍थर मारने की परंपरा क्यों है?

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रामीश स‌िद्द‌ीकी के मुताबिक बहुत से लोग यह मानते हैं क‌ि पत्‍थर उस स्तंभ में लगे, तभी शैतान भागता है। जबक‌ि कुरान और हदीस में बताया गया है क‌ि पत्‍थर उठाकर फेंकने भर से शैतान भाग जाता है। सिद्दीकी कहते हैं असल में यह अपने अंदर बैठी बुराइयों को दूर करने की बात है।
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ईद के मौके पर जान‌िए मदीना में शैतान को पत्‍थर मारने की परंपरा क्यों है?

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लेक‌िन लोग इस बात को गहराई में उतारने की बजाय प्रतीक में ऐसे डूब चुके हैं क‌ि इस प्रकार की घटनाएं सामने आ जाती है। इनका कहना है क‌ि अगर लोग कुरान और हदीस को अच्छी तरह से समझकर हज यात्रा करें तो इस तरह की दुर्घटनाएं रुक सकती हैं और लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव आ सकता है।
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