सूर्य ग्रहण
इसलिए डाला जाता है कुश
हमारे ऋषि-मुनियों की मान्यता के अनुसार ग्रहण के दौरान खाद्य वस्तुओं,जल आदि में सूक्ष्म जीवाणु एकत्रित होकर उसे दूषित कर देते हैं इसलिए इनमें कुश डाल दिया जाता है,ताकि कीटाणु कुश में एकत्रित हो जाएं और उन्हें ग्रहण के बाद फेंका जा सके। सूर्यग्रहण लगने के 12 घंटे पूर्व से ही उसका कुप्रभाव शुरू हो जाता है।अंतरिक्षीय प्रदूषण के इस समय को सूतक काल कहा गया है। इसलिए हमारी भारतीय संस्कृति में सूतक काल और ग्रहण के समय में भोजन तथा पेय पदार्थों में कुश डालकर उन्हें ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचाने की बात कही गई है।