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navratri 2020: ये हैं मां दुर्गा के खास और प्रसिद्ध मंदिर, इस मंदिर में नहीं होती है मां की मूर्ति पूजा

Fri, 16 Oct 2020 07:24 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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navratri 2020 - फोटो : navratri 2020
17 अक्तूबर से शारदीय नवरात्रि आरंभ होने वाली हैं। इस दौरान माता रानी के मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। भक्त माता के दर्शन करने के लिए मां के पावन मंदिरों में जाते हैं। देश भर में मां दुर्गा के बहुत सारे मंदिर हैं। जिनमें से कुछ मंदिर बहुत प्रसिद्ध, प्राचीन और खास हैं। हर मंदिर के विषय में कोई न कोई कथा और चमत्कार जुड़ा हुआ है। जानते हैं कौन से हैं मां के चमत्कारिक मंदिर -
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Kamakhya Shakti Peeth
कामाख्या शक्तिपीठ का तांत्रिक महत्व माना जाता है। यह मंदिर नीलांचल पर्वत पर है। यहां पर माता के सती का योनि भाग गिरा था। जिसके कारण यहां पर उनकी मूर्ति रुप में पूजा नहीं की जाती है। कामाख्या में लगने वाला अंबुवाची का मेला बहुत प्रसिद्ध है। यहां पर माता रजस्वला होती हैं। इसलिए मंदिर में एक सफेद वस्त्र बिछा दिया जाता है और तीन दिनों के बाद मंदिर के कपाटों को बंद कर दिया जाता है। कहते हैं कि जब तीन दिनों के पश्चात् कपाट खोले जाते हैं तो मंदिर में बिछा हुआ कपड़ा लाल हो जाता है। इस कपड़े के टुकड़ों को भक्तों में प्रसाद के रुप में बांटा जाता है। इसको अंबुवाची वस्त्र कहा जाता है।
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करणी माता मंदिर राजस्थान - फोटो : pinterest
राजस्थान के बीकानेर से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर करणी माता का मंदिर बना हुआ है। यह मंदिर छोटा है लेकिन भक्तों में इसकी बहुत मान्यता है। यहां पर चूहे मुख्य आकर्षण का केंद्र है। इस मंदिर में हजारों की संख्या में चूहे हैं। जिन्हें देखकर हर कोई दंग रह जाता है। इसी कारण इस मंदिर का नाम चूहे वाला मंदिर भी पड़ गया है। इतने चूहे होने के बाद भी यहां पर किसी तरह की बीमारी नहीं फैलती है। इस मंदिर को बहुत प्राचीन माना जाता है। कहते हैं कि साढ़े सात सौ वर्ष पहले यहां एक गुफा थी। जहां पर माता दुर्गा की अवतार माता करणी अपने इष्ट का पूजन किया करती थीं। इसलिए यहां पर मंदिर का निर्माण करवाया गया।

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kasar devi temple
उत्तराखंड के अल्मोड़ा शहर के करीब 8 किलोमीटर दूर काषाय पर्वत पर कसार देवी या कौशिकी देवी का मंदिर बना हुआ है। कहा जाता है कि इस स्थान पर माता कात्यायनी ने शुंभ-निशुंभ राक्षसों का संहार किया था। इसका उल्लेख दुर्गा सप्तशती के पाठ में भी मिलता है। अल्मोड़ा में बसे होने के कारण यहां की प्राकृतिक सुंदरता भी मंत्र मुग्ध कर देने वाली है।
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naina devi
नैना देवी का मंदिर भी मां के शक्तिपीठों में से एक है। जब भगवान शिव का मोह भंग करने और उन्हें तांडव से रोकने के लिए विष्णु जी ने सती के शरीर के टुकड़े किए थे तब यहां पर उनके नयन गिरे थे। यह मंदिर देवभूमि उत्तराखंड में है। यह मंदिर बहु प्रसिद्ध है। यहां पर पीपल का विशाल पेड़ बहुत प्राचीन माना जाता है।
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ज्वाला देवी
हिमाचल के कांगड़ा जिले में मां ज्वाला देवी का मंदिर बना हुआ है। यहां पर माता सती की जीभ गिरी थी। माना जाता है कि यहां पर माता भगवान शिव के साथ निवास करती हैं। ज्वाला देवी मंदिर की खासियत है कि यहां पर हमेशा बिना तेल और बाती के प्राकृतिक रुप से लौं जलती रहती है। कहते हैं एक बार राजा अकबर ने इस लौ को बुझाने का प्रयास किया था। परंतु बहुत कोशिश करने के बाद भी वह ऐसा करने में विफल रहा। जिसके बाद उसका अहंकार नष्ट हो गया और वह माता के सामने नतमस्तक हो गया।
 
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