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Shani Pradosh Vrat 2022: कब है अक्टूबर माह का दूसरा प्रदोष व्रत? जानिए तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

Sun, 16 Oct 2022 05:05 PM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Shani Pradosh Vrat 2022: कब है अक्टूबर माह का दूसरा प्रदोष व्रत? जानिए तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व
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कब है अक्टूबर माह का दूसरा प्रदोष व्रत - फोटो : अमर उजाला
Shani Pradosh Vrat 2022: हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह में दो बार प्रदोष व्रत पड़ता है। एक शुक्ल पक्ष और दूसरा कृष्ण पक्ष में। दोनों प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। इस माह का दूसरा प्रदोष व्रत 22 अक्टूबर दिन शनिवार को कृष्ण पक्ष में मनाया जाएगा। मान्यता है कि ये व्रत करने से शिव जी प्रसन्न होते हैं और शनि दोष भी दूर होता है। साथ ही कहा जाता है कि शनि प्रदोष व्रत पुत्र प्राप्ति की कामना से भी किया जाता है। मान्यता है कि शनि त्रयोदशी तिथि शनि देव की जन्म तिथि है। इसलिए इस दिन पूजा पाठ के अलावा शनि से संबंधित उपाय भी किए जाते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं शनि प्रदोष व्रत की तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व के बारे में... 

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कब है अक्टूबर माह का दूसरा प्रदोष व्रत - फोटो : amar ujala
शनि प्रदोष व्रत 2022 तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 22 अक्टूबर दिन शनिवार को शाम 06 बजकर 02 मिनट से शुरू हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन 23 अक्टूबर दिन रविवार को शाम 06 बजकर 03 मिनट पर होगा। त्रयोदशी तिथि की पूजा प्रदोष काल यानी शाम को की जाती है। ऐसे में शनि प्रदोष व्रत 22 अक्टूबर को ही रखा जाएगा। 
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कब है अक्टूबर माह का दूसरा प्रदोष व्रत - फोटो : amar ujala
शनि प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, 22 अक्टूबर को शाम 06 बजकर 02 मिनट से रात 08 बजकर 17 मिनट के बीच भगवान शिव की पूजा का शुभ मुहूर्त है। 

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कब है अक्टूबर माह का दूसरा प्रदोष व्रत - फोटो : amar ujala
प्रदोष व्रत अनुष्ठान और पूजा
प्रदोष व्रत वाले दिन पूजा के लिए प्रदोष काल यानी शाम का समय शुभ माना जाता है। सूर्यास्त से एक घंटे पहले, भक्त स्नान करें और पूजा के लिए तैयार हो जाएं। स्नान के बाद संध्या के समय शुभ मुहूर्त में पूजन आरंभ करें। गाय के दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल आदि से शिवलिंग का अभिषेक करें। फिर शिवलिंग पर श्वेत चंदन लगाकर बेलपत्र, मदार, पुष्प, भांग, आदि अर्पित करें। फिर विधिपूर्वक पूजन और आरती करें। 
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कब है अक्टूबर माह का दूसरा प्रदोष व्रत - फोटो : iStock
शनि प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। सभी दुखों को दूर करके सुख, शांति, समृद्धि प्रदान करते हैं। मान्यता ये भी है कि जो लोग संतानहीन हैं, उनको विशेषकर शनि प्रदोष व्रत करना चाहिए। भगवान शिव की कृपा से जातक को संतान की प्राप्ति होती है।  
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