shani dev
इसके बाद शनि देव ब्राह्मण का रूप लेकर पीपल के पेड़ के पास गए। वहीं पेड़ बना राक्षस शनि देव को साधारण ब्राह्मण समझकर खा गया। इसके बाद भगवान शनि उसका पेट चीरकर बाहर निकले और उस दैत्य का अंत किया। राक्षस का अंत होने से प्रसन्न ऋषि मुनियों ने शनि देव की जय जयकार करते हुए बहुत धन्यवाद दिया। शनि देव ने भी प्रसन्न होकर कहा कि जो भी प्राणी शनिवार के दिन पीपल के पेड़ का स्पर्श करेगा या उसकी पूजा करेगा, उसके सभी मनोरथ पूर्ण होंगे। वहीं जो भी व्यक्ति इस पेड़ के पास स्नान, ध्यान, हवन और पूजा करेगा, उसे मेरी पीड़ा कभी भी झेलनी नहीं पड़ेगी।