ज्योतिष में शनि को न्यायाधीश, कर्मफलदाता और दंडाधिकारी का दर्जा प्राप्त है। शनि का ज्योतिष में विशेष महत्व होता है क्यों कि यह एक ऐसे ग्रह हैं जो सबसे धीमे चलते हैं, शनि एक राशि में करीब ढाई वर्षो तक रहते हैं, फिर इसके बाद ही अगली राशि में प्रवेश करते हैं। मंद चाल के कारण सभी 12 राशियों का एक चक्कर लगाने में शनिदेव को करीब 30 वर्षो का समय लग जाता है। शनि एक मात्र ऐसे ग्रह हैं जिनको साढ़ेसाती और ढैय्या का अधिकार है।
न्याय के देवता और कर्मफलदाता शनि लंबे समय से अपनी स्वराशि कुंभ में रहने के बाद बीते 29 मार्च 2025 को देवगुरु बृहस्पति के आधिपत्य वाली राशि मीन में प्रवेश कर चुके है। शनिदेव मीन राशि में साल 2027 तक रहेंगे, फिर इसके बाद मीन राशि में प्रवेश करेंगे। शनि के मीन राशि में प्रवेश करते ही मकर राशि वालों पर चल रही साढ़ेसाती खत्म हो गई है और मेष राशि के लोगों पर साढ़ेसाती शुरू हो चुकी है।
29 जून को शनि के मीन राशि में गोचर करने के कारण मेष राशि पर साढ़ेसाती का पहला चरण, मीन राशि पर दूसरा चरण और कुंभ राशि वालों पर अंतिम चरण होगा। आइए जानते हैं मेष और मकर राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का कैसा प्रभाव आने वाले समय में देखने को मिलेगा।
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