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Shiv Shakti Rekha: शिव शक्ति रेखा का रहस्य, केदारनाथ से रामेश्वरम तक एक ही सीध में बने हैं शिव जी के 7 मंदिर

Wed, 16 Jul 2025 03:31 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शिव शक्ति रेखा एक ऐसी अद्भुत सीधी रेखा जो उत्तराखंड के केदारनाथ से शुरू होकर तमिलनाडु के रामेश्वरम तक जाती है। इन सात मंदिरों में न केवल केदारनाथ और रामेश्वरम जैसे दो ज्योतिर्लिंग शामिल हैं, बल्कि पंचतत्वों को दर्शाने वाले पांच प्रमुख शिव मंदिर भी आते हैं।
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शिव शक्ति रेखा के सात मंदिर - फोटो : adobe
Shiv Shakti Rekha Kedarnath To Rameshwaram: भारत में धार्मिकता और रहस्यों का गहरा संबंध है। इन्हीं रहस्यों में से एक है 'शिव शक्ति रेखा' एक ऐसी अद्भुत सीधी रेखा जो उत्तराखंड के केदारनाथ से शुरू होकर तमिलनाडु के रामेश्वरम तक जाती है। यह रेखा लगभग 2,382 किलोमीटर लंबी है और विशेष बात यह है कि इस सीध में भारत के सात प्रमुख शिव मंदिर स्थित हैं। ये सभी मंदिर लगभग 79 डिग्री देशांतर पर स्थित हैं, जो इस संयोग को और भी रहस्यमय बना देता है।

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इन सात मंदिरों में न केवल केदारनाथ और रामेश्वरम जैसे दो ज्योतिर्लिंग शामिल हैं, बल्कि पंचतत्वों (जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी और आकाश) को दर्शाने वाले पांच प्रमुख शिव मंदिर भी आते हैं। यह संयोजन आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
 
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केदारनाथ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
1. केदारनाथ धाम (उत्तराखंड)
हिमालय की गोद में 79.0669° देशांतर पर स्थित केदारनाथ मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसे अर्द्धज्योतिर्लिंग भी कहा जाता है और यह मंदिर शिव शक्ति रेखा की शुरुआत मानी जाती है।

2. श्रीकालाहस्ती मंदिर (आंध्र प्रदेश)
चित्तूर जिले में स्थित यह मंदिर वायु तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। यहां स्थापित शिवलिंग को स्वयंभू और जीवित लिंग माना जाता है। यह मंदिर तिरुपति से कुछ ही दूरी पर स्थित है और भक्तों के लिए बेहद पूज्य स्थल है।
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शिव शक्ति रेखा के सात मंदिर - फोटो : adobe
3. एकाम्बेश्वरनाथ मंदिर (कांचीपुरम, तमिलनाडु)
यह मंदिर पृथ्वी तत्व का प्रतीक है और कांचीपुरम के प्रमुख शिव मंदिरों में गिना जाता है। माना जाता है कि माता पार्वती ने यहां मिट्टी का शिवलिंग बनाकर तप किया था।

4. अरुणाचलेश्वर मंदिर (तिरुवन्नामलाई, तमिलनाडु)
अग्नि तत्व का प्रतीक यह मंदिर अरुणाचल पर्वत के तल पर स्थित है। इसे अग्नि लिंग के रूप में पूजा जाता है। यह स्थान दीपम पर्व और कार्तिगई दीपोत्सव के लिए प्रसिद्ध है।
 

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शिव शक्ति रेखा के सात मंदिर - फोटो : adobe stock
5. जम्बुकेश्वर मंदिर (तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु)
यह जल तत्व से जुड़ा हुआ मंदिर लगभग 1,800 वर्ष पुराना माना जाता है। यहां शिवजी की पूजा एक जल-स्रोत के समीप की जाती है, जो साल भर जल से भरा रहता है।

6. थिल्लई नटराज मंदिर (चिदंबरम, तमिलनाडु)
यह मंदिर आकाश तत्व का प्रतीक है और भगवान शिव को नटराज रूप में समर्पित है। यहां भगवान की नृत्य मुद्राओं को 108 भंगिमाओं में दर्शाया गया है।
 

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रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग - फोटो : instagram
7. रामेश्वरम मंदिर (तमिलनाडु)
रामेश्वरम, भगवान राम से जुड़ा एक पवित्र स्थल है और 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। इसे रामलिंगेश्वर भी कहा जाता है और यह शिव शक्ति रेखा का अंतिम मंदिर है।

इन सात मंदिरों का एक सीधी रेखा में स्थित होना न केवल भारत की सांस्कृतिक गहराई को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि भारत में आध्यात्मिक ऊर्जा और भूगोल के बीच गहरा संबंध है। यह रेखा एक अदृश्य धागे की तरह भगवान शिव की चेतना को उत्तर से दक्षिण तक जोड़ती है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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