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Sawan 2021: जानिए सावन में क्यों नहीं किया जाता दूध और साग का सेवन?

Wed, 14 Jul 2021 06:43 AM IST
संकल्प सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सावन में क्यों नहीं किया जाता दूध और साग का सेवन - फोटो : Pixabay
हमारे पौराणिक ग्रंथों में सावन के महीने को काफी पवित्र माना गया है। सावन का महीना भगवान शिव का महीना होता है। इस दौरान शिव भक्त कावड़ यात्रा पर जाते हैं। कावड़ यात्रा से लौटते वक्त शिव भक्त गंगाजल अपने साथ लेकर आते हैं और मंदिरों में शिव जी का उस गंगाजल से जलाभिषेक करते हैं। इस बार सावन के महीने की शुरुआत 25 जुलाई 2021 से हो रही है। मान्यता कहती है कि अगर इस महीने भगवान शिव की पूरी श्रद्धा के साथ पूजा की जाए तो भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। महादेव इससे प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के ऊपर कृपा दृष्टि बनाकर रखते हैं। इसके अलावा सावन के महीने में कुछ विशेष नियम हमारे पौराणिक शास्त्रों में बताए गए हैं, जिनका पालन इस महीने में जरूर करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार सावन के महीने में साग और दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे शरीर पर कई नकारात्मक असर पड़ते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर सावन के महीने में दूध और साग का सेवन करने को क्यों मना किया गया है?
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दूध - फोटो : iStock
हिंदू मान्यता के अनुसार दूध भगवान शिव का अत्यंत प्रिय है। इस कारण सावन के महीने में भगवान शिव का दूध के जरिए ही अभिषेक किया जाता है। इसी वजह से सावन के महीने में दूध का सेवन करने को हमारे शास्त्रों में मना किया गया है। 
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साग - फोटो : social media
भगवान शिव का प्रकृति के साथ एक अनोखा रिश्ता है। एक अर्थों में कहें तो उन्हें प्रकृति काफी प्रिय है। सावन का महीना बरसात का महीना होता है। इस कारण वर्षा के चलते पूरी प्रकृति उद्दीप्त हो उठती है। पेड़ पौधे उसके श्रृंगार बनते हैं। ऐसे में मान्यता है कि इस समय पेड़ पौधों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। साग भी पौधों का ही एक रूप है इसलिए सावन के महीने में साग का सेवन नहीं करना चाहिए।

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साग - फोटो : Social media
इस महीने में साग का सेवन नहीं करने की वैज्ञानिक वजह भी है। सावन माह में खूब वर्षा होती है। इस कारण खेतों में कीट, पतंगों और अन्य किस्म के कीड़े मकोड़ों की संख्या काफी बढ़ जाती है और कई हानिकारक किस्म की घास-फूस खेतों में उग जाती हैं। ऐसे में जब हम साग को खेत से लाते हैं और बनाकर उसका सेवन करते हैं, तो कई हानिकारक तत्व हमारे पेट के भीतर चले जाते हैं। इससे हमारा पाचन तंत्र खराब हो जाता है। 
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गाय - फोटो : pti
सावन के महीने में गाय और भैंस को जो चारा दिया जाता है, उसमें खेत से आए हुए कई हानिकारक घास-फूस मिले होते हैं। ऐसे में गाय भैंस चारे के सेवन करने के साथ-साथ कई हानिकारक तत्वों को भी खा लेती हैं। इस कारण उनके दूध के सेवन से वही हानिकारक तत्व हमारे भीतर भी पहुंच जाते हैं, जिसके चलते हमारे बीमार होने की संभावना बढ़ जाती है। 
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