भगवान शिव को नागनाथ भी कहा जाता है
भारतीय फलित ज्योतिष शास्त्र में नौ ग्रह माने गए हैं। इनमें राहु और केतु को छाया ग्रह माना गया है। राहु जहां सिर है वहीं केतु केवल धड़। पौराणिक कथा अनुसार राहु एक राक्षस है और वह बेहद बलशाली है। नौ ग्रहों में राहु कूटनीति, राजनीति, सट्टा, भ्रम और सत्ता पद का भी ग्रह माना गया है वहीं केतु मोक्षकारक और रहस्यमयी गुप्त विद्याओं का प्रदाय ग्रह माना गया है। दोनों ही ग्रह बहुत महत्वपूर्ण हैं और कलियुग में दोनों का ही प्रभाव माना गया है। कुंडली में राहु और केतु की स्थिति के अनुसार कालसर्प दोष का भी निर्माण होता है। नौ ग्रहों हर देवी देवता के अधीन भी माने गए हैं। इसे आप नौ ग्रह और देवताओं का संबंध भी कह सकते हैं। राहु की शांति के लिए जहां शिव की आराधना का महत्व बताया गया है वहीं केतु के लिए गणेश जी की आराधना।