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Prayagraj Hanuman Mandir: प्रयागराज के इस मंदिर में पीएम मोदी ने विधि-विधान से की पूजा, जानिए इसका महत्व

Fri, 13 Dec 2024 04:25 PM IST
शिखर बरनवाल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रधानमंत्री मोदी आज यानी शुक्रवार 13 दिसंबर को प्रयागराज के दौरे पर रहे हैं। वहां पर उन्होंने 'बड़े हनुमान जी' मंदिर में विधि-विधान से पूजा किया। आइए इस लेख में इस मंदिर के महत्व और इतिहास के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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प्रयागराज हनुमान मंदिर - फोटो : Adobe Stock
Prayagraj Hanuman Mandir: प्रधानमंत्री मोदी आज यानी शुक्रवार 13 दिसंबर को प्रयागराज के दौरे पर हैं। उन्होंने महाकुंभ 2025 से जुड़ी लगभग 7 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उदघाटन किया, इसके साथ ही उन्होंने 'बड़े हनुमान जी' के मंदिर जाकर दर्शन किए। जिस लेटे हुए हनुमान मंदिर में पीएम मोदी ने दर्शन किया वह अपनी विशिष्टता और ऐतिहासिक महत्व के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। इस मंदिर में हनुमान जी की विशाल, दक्षिणाभिमुखी प्रतिमा जमीन से कुछ नीचे लेटी हुई अवस्था में है। यह प्रतिमा न केवल अपनी भव्यता बल्कि अपने प्रतीकात्मक महत्व के लिए भी जानी जाती है। हनुमान जी के बायें हाथ में गदा और दायें हाथ में राम-लक्ष्मण होने के साथ ही, उनके पैरों के नीचे अहिरावण और कामदा देवी दबी होने का वर्णन किया जाता है। यह मंदिर अकबर के किले के पास गंगा किनारे स्थित है और इसकी स्थापना को लेकर कई किवदंतियां प्रचलित हैं। मान्यता है कि लंका विजय के बाद हनुमान जी यहीं विश्राम करने के लिए लेटे थे। यह मंदिर न केवल भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है बल्कि भारतीय संस्कृति और इतिहास का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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प्रयागराज हनुमान मंदिर - फोटो : Adobe Stock
मां जानकी के कहने पर किया था विश्राम!
प्रयागराज में स्थित लेटे हुए हनुमान मंदिर की कहानी बेहद रोचक है। मान्यता है कि लंका विजय के बाद थके हुए हनुमान जी माता सीता के कहने पर संगम के किनारे विश्राम करने लेटे थे। उसी स्थान पर बाद में मंदिर बनवाया गया। आज यह मंदिर 'बड़े हनुमान जी', 'किले वाले हनुमान जी आदि नामों से जाना जाता है। यह मंदिर करीब 600 साल पुराना है।
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हनुमान जी की फोटो - फोटो : अमर उजाला
मंदिर के लिए विंध्याचल पर्वत से मंगवाया विग्रह
एक अन्य मान्यता के अनुसार, कहते हैं कि कन्नौज के राजा के कोई संतान नहीं थी। उन्होंने अपने गुरु से उपाय पूछा। गुरु ने हनुमान जी की विश्राम मुद्रा में प्रतिमा बनाने का सुझाव दिया। राजा ने विंध्याचल से पत्थर मंगवाकर ऐसी ही प्रतिमा बनवाई। मान्यता है कि राजा ने इस प्रतिमा को नाव से संगम किनारे लाया था और वहीं स्थापित किया था। इसी स्थान पर आज लेटे हुए हनुमान का मंदिर है।

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हनुमान जी की तस्वीर - फोटो : freepik
कन्नौज के राजा द्वारा बनवाई गई हनुमान जी की विशाल प्रतिमा को नाव से संगम लाते समय डूब जाने के बाद, वर्षों बाद बाबा बालगिरी महाराज को गंगा के जलस्तर कम होने पर यह प्रतिमा मिली। उन्होंने इसे बाहर निकालकर मंदिर बनवाया। मान्यता है कि बरसात में गंगा का जलस्तर बढ़ने पर मंदिर डूब जाता था, मानो गंगा मां हनुमान जी को स्नान करा रही हों। खास बात ये है अभी भी बरसात के मौसम में जलस्तर बढ़ने पर मंदिर डूब जाता है, ऐसे में आज भी ऐसा माना जाता है कि मां गंगा हनुमान जी को स्नान करा रही हैं।
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प्रयागराज हनुमान मंदिर - फोटो : Adobe Stock
अकबर भी नहीं हटा पाया था हनुमान जी की मंदिर
जब अकबर ने प्रतिमा को हटाने की कोशिश की तो हनुमान जी का वजन बढ़ता गया और वे धरती में समाते गए। अकबर समझ गया कि कोई अदृश्य शक्ति है जो प्रतिमा को वहां से हटने नहीं दे रही। हारकर अकबर ने यह काम रोक दिया। आज भी लाखों भक्त इस मंदिर में आकर हनुमान जी के दर्शन करते हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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