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Phalgun Pradosh Vrat: 11 या 12 मार्च कब है फाल्गुन माह का अंतिम प्रदोष व्रत? जानें सही तिथि और शुभ मुहूर्त

Thu, 06 Mar 2025 03:16 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हर महीने दो बार प्रदोष व्रत का आयोजन किया जाता है। इस दिन सुबह से लेकर शाम तक व्रत रखा जाता है और भगवान शिव तथा उनके परिवार की आराधना की जाती है। पूजा के विधि-विधान के बाद व्रत का पारण किया जाता है। आइए जानते हैं कि मार्च महीने में पहला और फाल्गुन माह का अंतिम प्रदोष व्रत कब है।
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Pradosh Vrat 2025 - फोटो : Amar Ujala
Bhom Pradosh Vrat : हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का अत्यधिक महत्व है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए समर्पित है। इस विशेष दिन पर पूजा-अर्चना करने से भगवान शिव की कृपा से सुख, समृद्धि और जीवन में सफलता प्राप्त होती है। वास्तव में, हर महीने दो बार प्रदोष व्रत का आयोजन किया जाता है। इस दिन सुबह से लेकर शाम तक व्रत रखा जाता है और भगवान शिव तथा उनके परिवार की आराधना की जाती है। पूजा के विधि-विधान के बाद व्रत का पारण किया जाता है। आइए जानते हैं कि मार्च महीने में पहला और फाल्गुन माह का अंतिम प्रदोष व्रत कब है।

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Pradosh Vrat 2025 - फोटो : adobe stock
प्रदोष व्रत तिथि 
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि आरंभ: 11 मार्च, मंगलवार, प्रातः 8:13 मिनट पर 
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि समाप्त: 12 मार्च। बुधवार, प्रातः 9:11 मिनट पर
वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह का दूसरा प्रदोष व्रत 11 मार्च को होगा। यह प्रदोष व्रत फाल्गुन का अंतिम और मार्च का पहला प्रदोष व्रत होगा। चूंकि यह मंगलवार को पड़ रहा है, इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा।
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Pradosh Vrat 2025 - फोटो : Freepic
भौम प्रदोष व्रत का महत्व
त्रयोदशी की जो तिथि मंगलवार को आती है उसे भौम प्रदोष के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों में इस दिन को ऋण चुकाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। पुराणों के अनुसार, त्रयोदशी की रात के पहले प्रहर में जो व्यक्ति शिव की प्रतिमा के दर्शन करता है, उसकी सभी समस्याओं का समाधान हो जाता है।
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Pradosh Vrat 2025 - फोटो : freepik
इन नियमों का जरूर रखें ध्यान 
  • प्रदोष व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें।
  • अब पूजा स्थल को अच्छी तरह से साफ करें और भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें।
  • इसके बाद शिव परिवार की पूजा करें और भगवान शिव को बेल पत्र, फूल, धूप, दीप आदि अर्पित करें।
  • अब प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें, फिर पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और शिव चालीसा का पाठ अवश्य करें। 
  • इसके बाद ही अपना उपवास खोलें।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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