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Paryushan Parv 2025: पर्युषण पर्व आरंभ, जानें श्वेतांबर और दिगंबर क्यों रखते हैं ये व्रत?

Fri, 22 Aug 2025 10:18 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Paryushan Parv: यह आत्मशुद्धि, तप, स्वाध्याय, क्षमा और ध्यान का विशेष अवसर होता है, जिसे हर वर्ष भाद्रपद मास में मनाया जाता है।
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paryushan parv - फोटो : adobe stock
Paryushan Parv Rules: जैन धर्म का सबसे पवित्र और आत्मिक पर्व पर्युषण है, जिसे आत्मशुद्धि, तपस्या, स्वाध्याय और क्षमा की भावना के साथ मनाया जाता है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मअनुशासन, संयम और आत्मचिंतन का वास्तविक अवसर है। हर साल भाद्रपद मास में मनाया जाने वाला यह पर्व श्वेतांबर और दिगंबर, दोनों जैन संप्रदायों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दौरान व्रत, ध्यान, उपवास और आत्मनिरीक्षण के माध्यम से आत्मा को शुद्ध करने की साधना की जाती है।
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पर्युषण पर्व
पर्युषण पर्व 2025 में कब है?

श्वेतांबर संप्रदाय के अनुसार
यह पर्व 21 अगस्त 2025 से शुरू होकर 28 अगस्त 2025 तक चलेगा। ये कुल 8 दिन होते हैं जिन्हें "अष्टानिका" भी कहा जाता है।

दिगंबर संप्रदाय के अनुसार
यह पर्व 28 अगस्त 2025 से शुरू होकर 06 सितंबर 2025 तक मनाया जाएगा। इसे दशलक्षण पर्व कहा जाता है और यह 10 दिन तक चलता है।
विशेष बात यह है कि श्वेतांबरों का पर्व जिस दिन समाप्त होता है, उसी दिन से दिगंबरों का पर्व आरंभ होता है।
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paryushan parv - फोटो : adobe stock
 पर्युषण पर्व क्यों मनाया जाता है?
जैसे हिन्दू धर्म में चातुर्मास होता है, उसी प्रकार जैन धर्म में वर्षा ऋतु के दौरान साधु-साध्वियां एक ही स्थान पर रुककर तप, ध्यान और स्वाध्याय में लीन रहते हैं। भगवान महावीर की शिक्षाओं के अनुसार, यह आत्मशुद्धि और आत्मनिरीक्षण का समय है। साथ ही, पूरे वर्ष जाने-अनजाने में किसी को वाणी, कर्म या व्यवहार से पीड़ा दी हो, तो "क्षमा" मांगने और देने का यह श्रेष्ठ अवसर होता है। इसलिए इस पर्व का मुख्य उद्देश्य है- मिच्छामि दुक्कड़म (मेरी गलतियों के लिए क्षमा करें)।

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paryushan parv - फोटो : adobe stock
कैसे मनाया जाता है पर्युषण पर्व?
इस पर्व के दौरान जैन अनुयायी व्रत, उपवास, ध्यान, स्वाध्याय और आत्मचिंतन में लीन रहते हैं। भगवान महावीर ने 12 प्रकार के तप बताए हैं, जैसे:
  • अनशन (उपवास)
  • कायक्लेश (शारीरिक तप)
  • स्वाध्याय (धार्मिक अध्ययन)
  • ध्यान (मौन और आत्मसाधना)
  • प्रायश्चित (पश्चाताप)
  • रस परित्याग (स्वाद का त्याग) आदि।
कुछ लोग केवल जल पर निर्भर रहते हुए 3, 8 या यहां तक कि 30 दिनों तक उपवास करते हैं। श्वेतांबर संप्रदाय के लोग कल्पसूत्र का पाठ करते हैं, वहीं दिगंबर संप्रदाय के लोग दशलक्षण धर्म का अभ्यास करते हैं।
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paryushan parv - फोटो : adobe stock
पर्युषण पर्व के दौरान क्या न करें?
  • कीड़ों सहित किसी भी जीवित प्राणी को नुकसान न पहुँचाएं । 
  • सूर्यास्त के बाद भोजन न करें ।
  • क्रोध, लालच, अहंकार, छल से बचें।
  • फिल्मों, पार्टियों और अनावश्यक सैर से बचें; आध्यात्मिकता पर ध्यान केंद्रित करें ।
  • भोजन या संसाधनों को बर्बाद न करें।
  • जैन आहार प्रतिबंधों का सख्ती से पालन करें।
  • असत्य, गपशप या निंदा से बचें। 
  • दूसरों की आलोचना न करें, इसके बजाय आत्म-सुधार पर ध्यान केंद्रित करें।
 
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पर्युषण महापर्व - फोटो : अमर उजाला
पर्युषण पर्व का आध्यात्मिक महत्व
जैन अनुयायियों के अनुसार पर्युषण पर्व अंतर्मन की सफाई का पर्व है। इसमें आत्मा की गहराई से खोज होती है, ध्यान के माध्यम से मानसिक शांति प्राप्त होती है और जीवन में संयम, क्षमा व साधना के संस्कार विकसित होते हैं। यह पर्व केवल उपवास का नाम नहीं है, बल्कि यह "आत्मजागरण और क्षमा की भावना" को जीवन में उतारने का माध्यम है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
 
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