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यमराज के दर्शन नहीं करने है तो इस दिन करें व्रत और दान पुण्य

Wed, 09 Oct 2019 08:15 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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विष्णु
आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पापांकुशा एकादशी कहा गया है। अपने नाम के अनुसार यह एकादशी पाप कर्मों के प्रभाव को दूर करके पुण्य प्रदान करता है। भगवान श्री कृष्ण ने पद्मपुराण एवं ब्रह्मवैवर्त पुराण में इस एकादशी के पुण्यों का वर्णन किया है।
 
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विष्णु
युधिष्ठिर के पूछने पर श्री कृष्ण ने कहा था कि यह एकादशी पापों को हरनेवाली है। जो व्यक्ति जो व्यक्ति पापांकुशा एकादशी का व्रत रखकर सोना, तिल, गाय, अन्न, जल, छाता और जूते का दान करता है उसके पूर्वजन्म के भयंकर पाप भी नष्ट हो जाते हैं। पापांकुशा एकादशी का व्रत रखकर सोना, तिल, गाय, अन्न, जल, छाता और जूते का दान करता है उसके पूर्वजन्म के भयंकर पाप भी नष्ट हो जाते हैं।
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विष्णु
ऐसा व्यक्ति पुण्य कर्मों के प्रभाव के कारण नर्क की यातना सहने से बच जाता है। इन्हें मृत्यु के बाद यमराज के दर्शन नहीं करने पड़ते हैं। जो व्यक्ति एकादशी का व्रत नहीं कर पाता है वह भी इन वस्तुओं का दान करे तो उसे भी अपार पुण्य की प्राप्ति होती है।

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विष्णु
मुक्ति प्रदान करने के अलावा इस एकादशी के प्रभाव से शरीर स्वस्थ होता है। धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है और पुण्यात्मा मनुष्य को सुन्दर जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। जिसके साथ धर्मपूर्वक आचरण करते हुए मनुष्य उत्तम लोकों में जाता है।
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विष्णु
इस एकादशी के दिन गरूड़ पर विराजमान भगवान विष्णु के दिव्य रूप की पूजा करनी चाहिए। एकादशी की रात में जागरण करके हरि चिंतन, भजन करने वाले मनुष्य की अपने सहित कई पीढ़ियों का उद्धार हो जाता है।
 
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