Pandharpur Mahayatra: हिंदू सनातन धर्म में 'वारकरी संप्रदाय का कुंभ' कही जाने वाली पंढरपुर वारी (दिंडी यात्रा) महज एक पैदल यात्रा नहीं है। यह भगवान विठोबा (श्रीकृष्ण का स्वरूप) के प्रति अटूट प्रेम, समानता और असीम श्रद्धा का महासागर है। हर साल देवशयनी (आषाढ़ी) एकादशी के पावन अवसर पर लाखों भक्त भगवान विट्ठल की महापूजा और दर्शन के लिए इस पावन नगरी में एकत्रित होते हैं। आइए, इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक यात्रा के संपूर्ण स्वरूप को विस्तार से जानते हैं।
1. वर्ष 2026 का यात्रा कार्यक्रम (भक्ति मार्ग)
- यह एक अत्यंत अनुशासित 21 दिवसीय पैदल यात्रा होती है, जो महाराष्ट्र के विभिन्न कोनों से प्रारंभ होकर आषाढ़ी एकादशी पर पंढरपुर में संपन्न होती है। वर्ष 2026 का पूरा शेड्यूल इस प्रकार है।
- 7 जुलाई (देहू से प्रस्थान): संत तुकाराम महाराज की पावन पालकी ने देहू गांव से अपनी यात्रा शुरू की।
- 8 जुलाई (आलंदी से प्रस्थान): ज्ञान और भक्ति के प्रतीक संत ज्ञानेश्वर महाराज की पालकी आलंदी से रवाना हुई।
- 23 जुलाई (वाखरी मिलन): अलग-अलग मार्गों से आ रही ये दोनों मुख्य पालकियां वाखरी नामक स्थान पर एक-दूसरे से मिलेंगी।
- 24 जुलाई (पंढरपुर आगमन): लाखों वारकरियों का यह विशाल समूह भगवान विठोबा की पावन नगरी में प्रवेश करेगा।
- 25 जुलाई (आषाढ़ी एकादशी महासंगम): चंद्रभागा नदी के तट पर पवित्र स्नान और विट्ठल दर्शन के साथ इस 21 दिनों की यात्रा का समापन होगा।