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Pahalgam: पहलगाम के इस स्थान पर भगवान शिव ने काटा था पुत्र गणेश का शीश, जानिए क्या हैं मान्यताएं

Thu, 24 Apr 2025 04:09 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पहलगाम एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जो कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित है। यहां हजारों की संख्या में लोग घूमने के लिए आते हैं।
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Beliefs and mythology of Pahalgam temple - फोटो : adobe
Pahalgam Temple Mythology: पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। इस हमले में करीब 28 लोगों की मौत और 17 से अधिक घायल हुए हैं। आतंकवादियों के इस हमले से पूरा देश शोक में है और सरकार से उनके प्रति कड़ी कार्रवाई करने की मांग कर रहा है। आतंकियों द्वारा यह हमला तब किया गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर सऊदी अरब में थे। इस हमले में सीधे पाकिस्तान के शामिल होने की बात कही जा रही है।

हमले के जवाबी कार्रवाई में भारत सरकार ने सालों पुरानी सिंधु जल संधि के करार को स्थगित कर दिया है। दरअसल, पहलगाम एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जो कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित है। यहां हजारों की संख्या में लोग घूमने के लिए आते हैं। यह जगह मुख्य रूप से शंकुधारी वन, प्राकृतिक सौंदर्य और बर्फ से ढकी चोटियों के लिए प्रसिद्ध है। इतना ही नहीं इसे अमरनाथ यात्रा के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी माना जाता है।

इसके अलावा पहलगाम में मौजूद मंदिरों को लेकर भी तरह-तरह की मान्यताएं देशभर में प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक ममल मंदिर, जिसे ममलेश्वर भी कहते हैं। यह मंदिर पहलगाम में लिद्दर नदी के तट पर 2,200 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद है। ऐसी मान्यताएं हैं कि यह वहीं मंदिर है, जहां भगवान शिव ने अपने पुत्र गणेश का मस्तक शरीर से अलग कर दिया था। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
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Beliefs and mythology of Pahalgam temple - फोटो : freepik
क्या कहती हैं पौराणिक मान्यताएं
इस मंदिर को लेकर ऐसी मान्यताएं हैं कि एक बार माता पार्वती ने गणेश जी से कहा कि, वह स्नान करने जा रही हैं और वो किसी को अंदर आने की अनुमति न दें। देवी पार्वती के आदेशानुसार भगवान गणेश वहीं बैठे रहे और पहरेदारी करने लगे। इसी बीच भगवान शिव माता पार्वती से मिलने वहां आ पहुंचें। शिव जी अंदर की ओर जाने लगें। लेकिन वहां मौजूद भगवान गणेश ने शंकर जी को अंदर जाने से मना कर दिया।
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Beliefs and mythology of Pahalgam temple - फोटो : freepik
गणेश जी की बात सुनकर महादेव ने एक बार फिर उनसे वहां से हटने के लिए कहा। लेकिन माता की आज्ञा का पालन करते हुए गणेश जी वहीं बैठे रहें। इस बात से क्रोधित होकर महाकाल ने उनके हाथ में मौजूद त्रिशूल से भगवान गणेश का मस्तक शरीर से अलग कर दिया।
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Beliefs and mythology of Pahalgam temple - फोटो : freepik
इसी बीच वहां माता पार्वती आ गई और इस दृश्य को देखकर क्रोधित हो उठी। उन्होंने शिव जी को शुरुआत से सभी बातें बताई। देवी की बात सुनकर भोलेनाथ को पछतावा होने लगा। इस दौरान माता पार्वती ने गणेश जी को फिर से जीवित करने के लिए कहा। इसके बाद भोलेनाथ ने भगवान गणेश के शरीर पर हाथी का मस्तक लगाकर उन्हें जीवित कर दिया।
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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