Lord Vishnu: हिंदू धर्म में गुरुवार की उपासना का विशेष महत्व है, क्योंकि यह भगवान विष्णु की कृपा पाने का दिन है। मान्यता है कि गुरुवार को प्रभु की पूजा-अर्चना करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सभी पापों से मुक्ति भी मिलती हैं। ज्योतिष में गुरुवार का संबंध देवगुरु बृहस्पति से माना जाता है। कहते हैं कि गुरुवार के दिन पूजा, पाठ, हवन, दान और अन्य शुभ कार्य करने से कुंडली में देवगुरु बृहस्पति की स्थिति मजबूत होती हैं। यदि कुंडली में गुरु मजबूत होता है, तो साधक के विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, क्योंकि देवगुरु बृहस्पति विवाह सुख के कारक ग्रह है। ऐसे में गुरुवार की शाम को विधि-विधान से भगवान विष्णु की उपासना करने से आर्थिक तंगी, व्यापार में हानि व नौकरी से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। इसके अलावा वैवाहिक जीवन भी सुखमय बनता है। आइए इस दिन की संपूर्ण पूजा विधि के बारे में जानते हैं।
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गुरुवार की पूजा विधि
- फोटो : freepik
गुरुवार की पूजा विधि
गुरुवार के दिन पूजा करने से पहले पीले रंग के साफ वस्त्र धारण कर लें।
इसके बाद अब पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
फिर पूजा स्थल पर श्री हरि विष्णु की मूर्ति को स्थापित करते हुए प्रभु को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें।
पीली फूल माला और कुछ फूल चढ़ाएं।
अब प्रभु को अक्षत और केले का फल अर्पित करें।
फिर शुद्ध देसी घी का दीप जलाकर कुछ विष्णु जी के मंत्रों का जप करें।
विष्णु सहस्रनाम का पाठ।
अंत में आरती करें।
यदि संभव हो, तो जरुरतमंदों को दान-दक्षिणा दें।
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भगवान विष्णु की आरती
- फोटो : adobe stock
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥