जै हो नंदा देवी तेरी जै बोला...
- फोटो : अमर उजाला
मुख्य मेला अष्टमी को प्रारंभ होता है। इस दिन महिलाएं मांगलिक परिधानों में सज-सवर कर मां की पूजा के लिए मंदिर प्रांगण में एकत्र होती हैं। मेले के अंतिम दिन डोला उठता है, जिसमें दोनों देवियों के विग्रह रखे जाते हैं। डोले को नगर भ्रमण कराया जाता हैं।
अंत में देवी प्रतिमाओं का विसर्जन कर दिया जाता है। मेले के दिनों में उत्तराखंड कि लोक गाथाओं की धूम रहती हैं।
इन गाथाओं के गायक 'जगरिये' मंदिर परिसर में मां नंदा-सुनंदा की गाथा का गायन करते हैं। इस दौरान लोक गायकों की टोलियां नन्दा देवी मंदिर प्रांगण में एकत्र होती हैं। कहा जाता है कि उत्तराखंड की संस्कृति को समझने के लिए नंदादेवी मेला देखना जरूरी है।
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