इस मंदिर में भगवान सुब्रमण्यम की पत्थर की प्रतिमा से पसीना निकलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अक्टूबर-दिसंबर में यहां होने वाला त्योहार राक्षस सुरापदमन पर भगवान कार्तिकेय की जीत की खुशी में मनाया जाता है। कहते हैं भगवान की मूर्ति से निकलने वाला ये पसीना, राक्षस को मारने की उत्सुकता और क्रोध का प्रतीक है। जैसे-जैसे त्योहार समाप्त होता है। मूर्ति से पसीना कम होने लगता है। मंदिर के पुजारी भगवान के इस पसीने को जल के रूप में भक्तों के ऊपर छिड़कते हैं।