फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mangla Gauri Vrat 2026: सावन का पहला मंगला गौरी व्रत आज, जानें पूजा विधि, मंत्र और खास नियम

Tue, 04 Aug 2026 06:53 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Mangla Gauri Vrat 2026: इस बार सावन में पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त को रखा जाएगा। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धा से पूजा करने पर वैवाहिक जीवन में प्रेम, सौहार्द और स्थिरता बनी रहती है। आइए जानते हैं व्रत की विधि, नियम और मंत्र जाप...
विज्ञापन
1 of 5
मंगला गौरी व्रत पूजा विधि और मंत्र - फोटो : AI
Mangla Gauri Vrat Vidhi 2026: हिंदू परंपरा में मंगला गौरी व्रत को अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। यह व्रत सावन माह के प्रत्येक मंगलवार को रखा जाता है और विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की खुशहाली के लिए इसे करती हैं। यह व्रत माता पार्वती को समर्पित है, जिन्हें सौभाग्य और अखंड सुहाग की देवी माना जाता है। इस वर्ष सावन में चार मंगलवार पड़ रहे हैं, जिनमें पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धा से पूजा करने पर वैवाहिक जीवन में प्रेम, सौहार्द और स्थिरता बनी रहती है।
विज्ञापन

2 of 5
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि - फोटो : freepik
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि
व्रत की शुरुआत प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करने और स्वच्छ वस्त्र पहनने से होती है। सूर्योदय से पहले स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद घर के पूजा स्थल को साफ कर एक चौकी स्थापित करें और उस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। इस पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें तथा गंगाजल से स्थान को पवित्र करें। फिर श्रद्धापूर्वक व्रत का संकल्प लें।
 
विज्ञापन

3 of 5
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि - फोटो : Adobe stock
पूजा के दौरान माता पार्वती को लाल वस्त्र अर्पित करें और आटे का दीपक बनाकर प्रज्वलित करें। इसके बाद विधिपूर्वक शिव-पार्वती की पूजा करें और मंत्रों का जाप करें। व्रत में 16 संख्या का विशेष महत्व होता है, इसलिए पान, सुपारी, इलायची, लौंग, फल, फूल, मिठाई आदि 16 प्रकार की सामग्री अर्पित करना शुभ माना जाता है। साथ ही माता को सुहाग का सामान भी चढ़ाएं।

पूजन के बाद आरती करें और पांच प्रकार के मेवे तथा सात प्रकार के अन्न अर्पित करें। इसके पश्चात मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ अवश्य करें। पूजा समाप्त होने पर प्रसाद परिवारजनों में वितरित करें और अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को दान दें।
 

4 of 5
मंगला गौरी व्रत पूजा मंत्र - फोटो : adobe stock
मंगला गौरी व्रत पूजा मंत्र
'सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।'
'ॐ उमामहेश्वराय नम:' मंत्र का भी आप जप कर सकते हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
मंगला गौरी व्रत नियम - फोटो : Adobe stock
मंगला गौरी व्रत नियम
नियमों के अनुसार, व्रती को दिन में एक बार ही भोजन करना चाहिए। यदि किसी को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो, तो व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है। मान्यता है कि यदि यह व्रत लगातार पांच वर्षों तक किया जाए, तो पांचवें वर्ष सावन के अंतिम मंगलवार को विधिपूर्वक उद्यापन करना चाहिए। उद्यापन के बिना व्रत को पूर्ण नहीं माना जाता। श्रद्धा और नियम के साथ किया गया मंगला गौरी व्रत जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य प्रदान करता है।

Shivling Puja: शिवलिंग के सामने 3 बार ताली बजाना सही या गलत? जानें क्या है नियम और महत्व
Sawan Somvar Upay: मनचाहा वर पाने के लिए सावन में करें ये 5 खास उपाय, विवाह में आ रही बाधाएं होंगी दूर

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें