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Mahashivratri: उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र के दुर्लभ संयोग में महाशिवरात्रि, जानें शुभ योग और पूजा मुहूर्त

Wed, 11 Feb 2026 07:59 AM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी

सार

Mahashivratri 2026 Shubh yog: महाशिवरात्रि पर उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र का विशेष युग्म संयोग बन रहा है, जो एक दुर्लभ और अत्यंत फलदायी योग है। ऐसे में आइए जाने हैं कि इस साल महाशिवरात्रि के दिन कौन-कौन से शुभ योग बन रहे हैं और इस दिन पूजा करने का शुभ समय क्या रहेगा।
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शुभ संयोग में महाशिवरात्रि 2026 - फोटो : Amar Ujala
Mahashivratri 2026 Puja Muhurat Shubh yog: 15 फरवरी 2026 रविवार को महाशिवरात्रि पर उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र का विशेष युग्म संयोग बन रहा है, जो एक दुर्लभ और अत्यंत फलदायी योग है। इस दिन शाम 07:48 तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और उसके बाद श्रवण नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि व अन्य शुभ योग (व्यतीपात, वरियान) रहेंगे, जो पूजा-साधना के लिए उत्तम माने गए हैं। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 15 फरवरी को शाम में 5 बजकर 4 मिनट पर होगा। वहीं, अगले दिन यानी 16 फरवरी को शाम में 5 बजकर 34 मिनट पर तिथि समाप्त होगी। शास्त्रों के नियम के अनुसार, महाशिवरात्रि का पर्व जब मनाया जाता है जब चतुर्दशी तिथि निशीथ काल का समय भी लग रही हो। ऐसे में 15 फरवरी को चतुर्दशी तिथि निशीथ काल के समय होने के कारण 15 फरवरी रविवार को ही महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा।

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दुर्लभ संयोग - फोटो : adobe stock
दुर्लभ संयोग
महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन रहेगा। 15 फरवरी को सुबह 7 बजे से शाम 7 बजकर 48 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। यह योग जीवन के सभी कार्यों में सफलता और उन्नति का संकेत देता है। साथ ही, व्यतीपात और वरियान योग भी बन रहे हैं। व्यतीपात योग पूरे दिन विद्यमान रहेगा, जो आध्यात्मिक साधना और मंत्र जाप के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। 

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शिव पूजा का विशेष महत्व - फोटो : adobe stock
शिव पूजा का विशेष महत्व
उत्तराषाढा और श्रवण नक्षत्र का संयोग शिव-शक्ति मिलन का प्रतीक है, जिससे सूर्य की ऊर्जा (तेज, सफलता) और चंद्रमा का फल (मानसिक शांति, शीतलता) दोनों प्राप्त होंगे, और किए गए कार्यों में सिद्धि मिलेगी। इस योग में पूजा करने से जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और सफलता प्राप्त होगी।

श्रवण नक्षत्र का प्रारंभ 15 फरवरी को शाम 7 बजकर 48 मिनट पर होगा और 16 फरवरी की सुबह 8 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। श्रवण नक्षत्र को ज्ञान, साधना और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। निशिता काल महाशिवरात्रि पूजा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण समय माना जाता है, निशिता काल मुहूर्त रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त दोपहर 12 बजे मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त और दोपहर 12 बजकर 59 मिनट से 2 बजकर 41 मिनट तक अमृतकाल रहेगा, जो पूजा और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
 

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महाशिवरात्रि पर चार पहर का पूजा मुहूर्त - फोटो : adobe stock
महाशिवरात्रि पर चार पहर का पूजा मुहूर्त
पहला प्रहर 15 फरवरी की शाम 6:01 बजे से रात 9:12 बजे तक 
दूसरा प्रहर 15 फरवरी की रात 9:12 बजे से 16 फरवरी की रात 12:22 बजे तक
तीसरा प्रहर 16 फरवरी की रात 12:22 बजे से सुबह 3:33 बजे तक
चौथा प्रहर 16 फरवरी को सुबह 3:33 बजे से 6:44 बजे तक रहेगा

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चार प्रहर की पूजा का महत्व - फोटो : adobe stock
चार प्रहर की पूजा का महत्व
शास्त्रों में महाशिवरात्रि की रात के चारों प्रहरों में शिव पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। प्रत्येक प्रहर की पूजा का अलग आध्यात्मिक फल होता है। चारों प्रहर की पूजा करने से धन, यश, स्थिरता, और संतान से जुड़ी बाधाओं से मुक्ति मिलने की मान्यता है।

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भगवान शिव को अर्पित वस्तुओं का महत्व - फोटो : adobe stock
भगवान शिव को अर्पित वस्तुओं का महत्व
  • गंगाजल: मानसिक अशांति से मुक्ति
  • दूध: उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति
  • दही: जीवन में स्थिरता और गंभीरता
  • घी: पौरुष, बल, बुद्धि और विवेक में वृद्धि
  • मधु: वाणी में मधुरता
  • गुड़: दुख, कष्ट और दरिद्रता का नाश
  • इत्र: मन, कर्म और विचारों की पवित्रता
  • केसर: यश, वैभव और सौम्यता
  • भांग: रोग-शोक और नकारात्मक ऊर्जा का नाश
  • चंदन: मान-सम्मान और यश-कीर्ति में वृद्धि
  • बिल्वपत्र: चल-अचल संपत्ति की प्राप्ति

वैदिक विभूषण ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी


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