शिव पूजा का विशेष महत्व
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शिव पूजा का विशेष महत्व
उत्तराषाढा और श्रवण नक्षत्र का संयोग शिव-शक्ति मिलन का प्रतीक है, जिससे सूर्य की ऊर्जा (तेज, सफलता) और चंद्रमा का फल (मानसिक शांति, शीतलता) दोनों प्राप्त होंगे, और किए गए कार्यों में सिद्धि मिलेगी। इस योग में पूजा करने से जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और सफलता प्राप्त होगी।
श्रवण नक्षत्र का प्रारंभ 15 फरवरी को शाम 7 बजकर 48 मिनट पर होगा और 16 फरवरी की सुबह 8 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। श्रवण नक्षत्र को ज्ञान, साधना और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। निशिता काल महाशिवरात्रि पूजा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण समय माना जाता है, निशिता काल मुहूर्त रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त दोपहर 12 बजे मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त और दोपहर 12 बजकर 59 मिनट से 2 बजकर 41 मिनट तक अमृतकाल रहेगा, जो पूजा और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।