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Mahamrityunjaya Mantra: अकाल मृत्यु को भी टाल देता है महामृत्युंजय मंत्र, जानिए कैसे हुई इसकी रचना

Wed, 28 Jun 2023 09:45 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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महामृत्युंजय मंत्र की उत्पत्ति कैसे हुई - फोटो : iStock
Mahamrityunjaya Mantra: शास्त्रों में भगवान शिव शंकर के कई चमत्कारिक मंत्र बताए गए हैं। इन्हीं में से एक है महामृत्युंजय मंत्र। इस मंत्र को बहुत ही शक्तिशाली माना गया है। कहा जाता है कि यदि इस मंत्र का जाप एक निश्चित संख्या में किया जाए तो पुराने से पुराना और असाध्य रोग भी टल जाता है। साथ ही कहा जाता है कि महामृत्युंजय मंत्र के जाप से अकाल मृत्यु का संकट भी टल जाता है। किसी की कुंडली में यदि अकाल मृत्यु का योग बने तो उसे महामृत्युंजय मंत्र के जाप की सलाह दी जाती है। इसके जाप से मनुष्य को लंबी आयु प्राप्त होती है। साथ ही भगवान शिव की कृपा से यमराज भी ऐसे व्यक्ति को कोई कष्ट नहीं देते हैं। चलिए जानते हैं कि महामृत्युंजय मंत्र की रचना कैसे हुई और इस मंत्र को इतना प्रभावशाली क्यों माना गया है...

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महामृत्युंजय मंत्र की उत्पत्ति कैसे हुई - फोटो : iStock
महामृत्युंजय मंत्र की उत्पत्ति कैसे हुई 
पौराणिक कथा के अनुसार एक समय ऋषि मृकण्डु ने संतान प्राप्ति के लिए भगवान शिव की कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव जी ने ऋषि मृकण्डु को इच्छानुसार संतान प्राप्त होने का वरदान दिया। इसके कुछ समय पश्चात ऋषि मृकण्डु को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। पुत्र के जन्म के पश्चात ऋषियों ने बताया कि इस संतान की आयु केवल 16 वर्ष ही होगी। यह सुनते ही ऋषि मृकण्डु विषाद से घिर गए।
 
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महामृत्युंजय मंत्र की उत्पत्ति कैसे हुई - फोटो : iStock
अपने पति को चिंता से घिरा हुआ देख जब ऋषि मृकण्डु की पत्नी ने उनसे दुख का कारण पूछा तब उन्होंने सारा वृतांत बताया। इस पर उनकी पत्नी ने कहा कि यदि शिव जी की कृपा होगी, तो यह विधान भी टल जाएगा। ऋषि ने अपने पुत्र का नाम मार्कण्डेय रखा और उन्हें शिव मंत्र भी दिया। मार्कण्डेय सदैव शिव भक्ति में लीन रहा करते थे। समय बीतता गया और मार्कण्डेय बड़े होते गए। जब समय निकट आया तो ऋषि मृकण्डु ने अल्पायु की बात अपने पुत्र मार्कण्डेय को बताई। इसी के साथ ही उन्होंने कहा कि यदि शिवजी चाहेंगें तो इसे टाल देंगें।

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महामृत्युंजय मंत्र की उत्पत्ति कैसे हुई - फोटो : iStock
तब अपने माता-पिता के दुख को दूर करने के लिए मार्कण्डेय ने शिव जी से दीर्घायु का वरदान पाने के लिए आराधना शुरू कर दी। शिवजी की आराधना के लिए मार्कण्डेय जी ने महामृत्युंजय मंत्र की रचना की और शिव मंदिर में बैठ कर इसका अखंड जाप करने लगे।

महामृत्युंजय मंत्र- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
 
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महामृत्युंजय मंत्र की उत्पत्ति कैसे हुई - फोटो : iStock
वहीं जब मार्कण्डेय की आयु पूर्ण हो गई तब उनके प्राण लेने के लिए यमदूत आये परंतु उस समय मार्कण्डेय जी भगवान शिव की तपस्या में लीन थे। यह देखकर यमदूत वापस यमराज के पास गए और वापस आकर पूरी बात बताई। इसके बाद यमराज स्वयं मार्कण्डेय के प्राण लेने के लिए आए। जैसे ही उन्होंने मार्कण्डेय के प्राण लेने के लिए अपना पाश उनपर डाला, तो बालक मार्कण्डेय शिवलिंग से लिपट गए।

 
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महामृत्युंजय मंत्र की उत्पत्ति कैसे हुई - फोटो : iStock
ऐसे में पाश गलती से शिवलिंग पर जा गिरा। यमराज की आक्रमकता पर शिव जी अत्यंत क्रोधित हो गए और अपने भक्त की रक्षा हेतु भगवान शिव यमराज के समक्ष प्रकट हो गए, तब यम देव ने विधि के नियम की याद दिलाई, लेकिन शिवजी ने मार्कण्डेय को दीर्घायु का वरदान देकर विधान ही बदल दिया।
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महामृत्युंजय मंत्र की उत्पत्ति कैसे हुई - फोटो : iStock
इस तरह से मार्कण्डेय ने भगवान शिव की भक्ति में लीन रहते हुए महामृत्युंजय मंत्र की रचना की और भगवान शिव ने यमराज से उनके प्राणों की रक्षा की। यही वजह है कि महामृत्युंजय मंत्र को मृत्यु टालने वाला मंत्र कहा जाता है।
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