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Maha Shivratri 2021: जानिए क्या है शिवलिंग का रहस्य, क्यों मनाई जाती है शिवरात्रि?

Sat, 06 Mar 2021 07:53 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली
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maha shivratri 2021: शिव पुराण में वर्णित है कि शिवजी के निराकार स्वरुप का प्रतीक  'लिंग' शिवरात्रि की  पावन तिथि की महानिशा में प्रकट होकर सर्वप्रथम ब्रह्मा और विष्णु के द्वारा पूजित हुआ था। - फोटो : अमर उजाला
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि को आदिदेव भगवान शिव ,करोड़ों सूर्यों के समान प्रभाव वाले ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। यही वजह है कि इसे हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महापर्व के रूप में मनाया जाता है। महाशिवरात्रि वह महारात्रि है जिसका शिव तत्व से घनिष्ठ सम्बन्ध है। यह पर्व शिव के दिव्य अवतरण का मंगल सूचक पर्व है। उनके निराकार से साकार रूप में अवतरण की रात्रि ही महाशिवरात्रि कहलाती है। वह हमें काम, क्रोध, लोभ, मोह, मत्सर आदि विकारों से मुक्त करके परम सुख शान्ति एवं ऐश्वर्य प्रदान करते हैं।
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MahaShivratri 2021 - फोटो : अमर उजाला
क्या है शिवलिंग
शिव पुराण में वर्णित है कि शिवजी के निराकार स्वरुप का प्रतीक  'लिंग' शिवरात्रि की  पावन तिथि की महानिशा में प्रकट होकर सर्वप्रथम ब्रह्मा और विष्णु के द्वारा पूजित हुआ था। वातावरण सहित घूमती धरती या अनंत ब्रह्माण्ड का अक्स ही लिंग है । इसलिए इसका आदि व अंत भी देवताओं तक के लिए अज्ञात है । सौरमंडल के ग्रहों के घूमने की कक्षा ही शिव के तन पर लिपटे सर्प हैं । मुण्डकोपनिषद के अनुसार सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि ही उनके तीन नेत्र हैं ।
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महाशिवरात्रि 2021 - फोटो : अमर उजाला
बादलों के झुरमुट जटाएं ,आकाश जल ही सिर पर स्थित गंगा और सारा ब्रह्माण्ड ही उनका शरीर है। शिव कभी गर्मी के आसमान की तरह अर्थात चांदी की तरह दमकते , तो कभी सर्दी के आसमान की तरह मटमैले होने से भभूत लपेटे तन वाले हैं । यानि शिव सीधे-सीधे ब्रह्माण्ड या अनंत प्रकृति की ही साक्षात मूर्ती हैं। मानवीकरण में वायु प्राण ,दस दिशाएं पंचमुखी महादेव के दस कान, ह्रदय सारा विश्व , सूर्य नाभि या केंद्र और अमृत यानि जलयुक्त कमंडल हाथ में रहता है। शून्य, आकाश , अनंत, ब्रह्माण्ड और निराकार परम पुरुष का प्रतीक होने से इसे लिंग कहा गया है। स्कन्द पुराण में कहा है कि आकाश स्वयं लिंग है,धरती उसका पीठ या आधार है और सब अनंत शून्य से पैदा हो उसी में लय होने के कारण इसे लिंग कहा गया है।
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mahashivratri 2020 - फोटो : mahashivratri 2020
महाशिवरात्रि से जुड़ी कथा
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार , सती का पार्वती के रूप में पुनर्जन्म हुआ था। माँ पार्वती ने आरम्भ में अपने सौंदर्य से  भगवान शिव को रिझाना चाहा लेकिन वे सफल नहीं हो सकीं। इसके बाद त्रियुगी नारायण से पांच किलोमीटर दूर गौरीकुंड में कठिन ध्यान और साधना से उन्होंने  शिवजी  का मन जीत लिया। इसी दिन भगवान शिव और आदिशक्ति का विवाह संपन्न हुआ। भगवान शिव का तांडव और माता भगवती के लास्यनृत्य के समन्वय से ही सृष्टि में संतुलन बना हुआ है।
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