आचार्य चाणक्य
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पुस्तकेषु च या विद्या परहस्तेषु च यद्धनम् ।
उत्पन्नेषु च कार्येषु न सा विद्या न तद्धनम् ॥
आचार्य चाणक्य नीति शास्त्र में धन और शिक्षा जुड़ी महत्वपूर्ण बातों के बारे में जिक्र किया है। आचार्य चाणक्य इस श्लोक के माध्यम से कहते हैं कि जो विद्या पुस्तकों तक ही सीमित है, वह समय पड़ने पर मनुष्य के किसी काम नहीं आती है। चाणक्य किताबी ज्ञान के साथ व्यवहारिक ज्ञान को भी बहुत महत्वपूर्ण मानते थे। महत्वपूर्ण विषयों की अच्छी जानकारी होने के साथ मनुष्य को समाज के बारे में भी व्यवहारिक समझ होनी चाहिए।