भगवान शिव की पूजा के लिए बेलपत्र, अक्षत, दीप, धूप और गंगाजल का उपयोग करें।
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प्रदोष व्रत पूजा विधि 2026
प्रात: काल पूजा विधि
माघ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्वच्छ स्नान करें। इसके बाद भगवान शिव की पूजा के लिए बेलपत्र, अक्षत, दीप, धूप और गंगाजल का उपयोग करें। हाथ में जल और पुष्प लेकर पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ व्रत करने का संकल्प लें। दिनभर फलाहार या हल्का उपवास करते हुए शाम का इंतजार करें और प्रदोष काल में विशेष पूजा करें।
प्रदोष काल पूजा विधि
दिनभर उपवास रखने के बाद सूर्यास्त के समय स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को स्वच्छ जल या गंगाजल से शुद्ध करें। अब गाय के गोबर की सहायता से मंडप तैयार करें और उसमें पांच अलग-अलग रंगों से रंगोली सजाएँ। पूजा के लिए उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुशा के आसन पर बैठें।
इसके बाद भगवान शिव के मंत्र "ॐ नमः शिवाय" का जाप करें और शिवलिंग पर जल चढ़ाएँ। इस प्रकार श्रद्धा और विधिपूर्वक पूजा करने से प्रदोष व्रत का फल प्राप्त होता है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।