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Lord Shiva: भगवान शिव को क्यों कहते हैं आदिश्वर, आदिदेव, महादेव और आदिगुरु?

Sat, 12 Jul 2025 12:45 PM IST
ज्योति मेहरा शैली प्रकाश

सार

भगवान शिव को आदिश्वर और आदिगुरु भी कहा गया है। इसके अलावा उन्हें आदिदेव और महादेव भी कहा जाता है, आखिर क्यों? जानिए विस्तार से...
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भगवान शिव को क्यों कहते हैं आदिश्वर - फोटो : adobe
हिंदू धर्म में भगवान शिव को सर्वोच्च देव माना गया है। ब्रह्माजी ऋषि एवं ग्रहस्थ परंपरा, शिव संन्यासी और योगी तो भगवान विष्णु भक्ति, ज्ञान और योग की परंपरा के वाहक है। भगवान शिव को आदिश्वर और आदिगुरु भी कहा गया है। इसके अलावा उन्हें आदिदेव और महादेव भी कहा जाता है, आखिर क्यों? जानिए विस्तार से...

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1. आदिश्वर : भगवान शिव का एक नाम है आदिश। आदिश का अर्थ प्रारंभिक ईश। यानी प्रथम ईश्वर। इस आदिश से ही आदेश शब्द की उत्पत्ति मानी जाती है। उन्हें इसी क्रम में जगदीश्वर, आदिनाथ या विश्वेश्वर भी कहा जाता है। यानी जगत या सारे विश्व का ईश्वर। 
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भगवान शिव को क्यों कहते हैं आदिदेव - फोटो : adobe stock
2. आदिदेव: सर्वप्रथम शिव ने ही धरती पर जीवन के प्रचार-प्रसार का प्रयास किया इसलिए उन्हें 'आदिदेव' भी कहा जाता है। 'आदि' का अर्थ प्रारंभ। भारत की असुर, दानव, राक्षस, गंधर्व, यक्ष, आदिवासी, घूमंतू, नागवंशी, जनजाति और सभी वनवासियों के आराध्य देव शिव ही हैं। शैव धर्म भारत के आदिवासियों का धर्म है। इसलिए उन्हें आदिदेव यानी प्रारंभिक देव कहते हैं।
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भगवान शिव को क्यों कहते हैं महादेव - फोटो : adobe
3. महादेव: वे सभी देवों के देव हैं इसलिए उन्हें महादेव कहते हैं। इसी क्रम में उन्हें देवाधिदेव भी कहते हैं। सभी देवी और देवता उनकी पूजा करते हैं। सभी दसनामी, शाक्त, सिद्ध, दिगंबर, नाथ, दत्त, लिंगायत, तमिल शैव, कालमुख शैव, कश्मीरी शैव, वीरशैव, नाग, लकुलीश, पाशुपत, कापालिक, कालदमन और महेश्वर सभी शैव धर्म से जुड़े हुए हैं। चंद्रवंशी, सूर्यवंशी, अग्निवंशी और नागवंशी भी शिव की ही परंपरा से ही माने जाते हैं। इसलिए भी उन्हें सभी संप्रदायों का प्रथम देव माना गया है।

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भगवान शिव को क्यों कहते हैं आदिगुरु - फोटो : adobe
4. आदिगुरु: शिव ने ही गुरु और शिष्य परंपरा की शुरुआत की थी। शिव के 7 शिष्य हैं जिन्हें प्रारंभिक सप्तऋषि माना गया है। इन ऋषियों ने ही शिव के ज्ञान को संपूर्ण धरती पर प्रचारित किया जिसके चलते भिन्न-भिन्न धर्म और संस्कृतियों की उत्पत्ति हुई। शिव के शिष्य हैं- बृहस्पति, विशालाक्ष, शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज इसके अलावा 8वें गौरशिरस मुनि भी थे।  
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भगवान शिव को क्यों कहते हैं आदिगुरु - फोटो : freepik
भगवान शंकर की परंपरा को उनके शिष्यों बृहस्पति, विशालाक्ष (शिव), शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज, अगस्त्य मुनि, गौरशिरस मुनि, नंदी, कार्तिकेय, भैरवनाथ आदि ने आगे बढ़ाया। इस परंपरा में सबसे बड़ा नाम आदिगुरु भगवान दत्तात्रेय का आता है। दत्तात्रेय के बाद आदि शंकराचार्य, मत्स्येन्द्रनाथ और गुरु गुरुगोरखनाथ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
शैली प्रकाश

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