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Krishna Janmashtami 2025: श्रीकृष्ण ने सीखी थी 64 दिनों में 64 कलाएं, जानिए क्या थी वो कलाएं

Mon, 11 Aug 2025 10:23 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

धर्मशास्त्रों में वर्णित है कि भगवान श्रीकृष्ण 64 कलाओं में पूर्ण निपुण थे, चाहे वह संगीत हो, नृत्य, या अन्य विद्या। गुरु संदीपनि के मार्गदर्शन में श्रीकृष्ण ने कम समय में ही 64 कलाओं का गहन ज्ञान अर्जित कर लिया, जो आज भी अद्वितीय माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि यह 64 कलाएं कौन सी हैं...
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श्रीकृष्ण और 64 कलाएं - फोटो : Adobe Stock
Krishna Janmashtami 2025: इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त को मनाई जाएगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है।

श्रीकृष्ण और 64 कलाएं
धर्मशास्त्रों में वर्णित है कि भगवान श्रीकृष्ण 64 कलाओं में पूर्ण निपुण थे, चाहे वह संगीत हो, नृत्य, या अन्य विद्या। आश्चर्यजनक रूप से उन्होंने इन सभी कलाओं का ज्ञान केवल 64 दिनों में प्राप्त कर लिया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार श्रीकृष्ण ने अपनी शिक्षा उज्जैन स्थित गुरु संदीपनि के आश्रम में प्राप्त की। उनके साथ भाई बलराम और सखा सुदामा भी वहां विद्या अध्ययन के लिए उपस्थित थे। माना जाता है कि यह स्थान विश्व का सबसे प्राचीन गुरुकुल माना जाता है। गुरु संदीपनि के मार्गदर्शन में श्रीकृष्ण ने कम समय में ही 64 कलाओं का गहन ज्ञान अर्जित कर लिया, जो आज भी अद्वितीय माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि यह 64 कलाएं कौन सी हैं...

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श्रीकृष्ण और 64 कलाएं - फोटो : Adobe Stock
क्या हैं वो 64 कलाएं 

श्रीमदभागवतपुराण के दशम स्कन्द के 45 वें अध्याय के अनुसार श्री कृष्ण निम्न 64 कलाओं में पारंगत थे-
1- नृत्य – नाचना
2- वाद्य- तरह-तरह के बाजे बजाना
3- गायन विद्या – गायकी।
4- नाट्य – तरह-तरह के हाव-भाव व अभिनय
5- इंद्रजाल- जादूगरी
6- नाटक आख्यायिका आदि की रचना करना
7- सुगंधित चीजें- इत्र, तेल आदि बनाना
8- फूलों के आभूषणों से श्रृंगार करना
9- बेताल आदि को वश में रखने की विद्या
10- बच्चों के खेल
11- विजय प्राप्त कराने वाली विद्या
12- मन्त्रविद्या
13- शकुन-अपशकुन जानना, प्रश्नों उत्तर में शुभाशुभ     बतलाना
14- रत्नों को अलग-अलग प्रकार के आकारों में काटना
15- कई प्रकार के मातृका यन्त्र बनाना


 
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श्रीकृष्ण और 64 कलाएं - फोटो : Adobe Stock
16- सांकेतिक भाषा बनाना
17- जल को बांधना।
18- बेल-बूटे बनाना
19- चावल और फूलों से पूजा के उपहार की रचना   करना। (देव पूजन या अन्य शुभ मौकों पर कई रंगों से   रंगे चावल, जौ आदि चीजों और फूलों को तरह-तरह से   सजाना)
20- फूलों की सेज बनाना।
21- तोता-मैना आदि की बोलियां बोलना – इस कला के जरिए तोता-मैना की तरह बोलना या उनको बोल सिखाए जाते हैं।
22- वृक्षों की चिकित्सा
23- भेड़, मुर्गा, बटेर आदि को लड़ाने की रीति
24- उच्चाटन की विधि
25- घर आदि बनाने की कारीगरी
26- गलीचे, दरी आदि बनाना
27- बढ़ई की कारीगरी
28- पट्टी, बेंत, बाण आदि बनाना यानी आसन, कुर्सी, पलंग आदि को बेंत आदि चीजों से बनाना।
29- तरह-तरह खाने की चीजें बनाना यानी कई तरह सब्जी, रस, मीठे पकवान, कड़ी आदि बनाने की कला।
30- हाथ की फूर्ती के काम

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श्रीकृष्ण और 64 कलाएं - फोटो : Adobe Stock
31- चाहे जैसा वेष धारण कर लेना
32- तरह-तरह पीने के पदार्थ बनाना
33- द्यू्त क्रीड़ा
34- समस्त छन्दों का ज्ञान
35- वस्त्रों को छिपाने या बदलने की विद्या
36- दूर के मनुष्य या वस्तुओं का आकर्षण
37- कपड़े और गहने बनाना
38- हार-माला आदि बनाना
39- विचित्र सिद्धियां दिखलाना यानी ऐसे मंत्रों का प्रयोग
40-कान और चोटी के फूलों के गहने बनाना – स्त्रियों की चोटी पर सजाने के लिए गहनों का रूप देकर फूलों को गूंथना।
41- कठपुतली बनाना, नाचना
42- प्रतिमा आदि बनाना
43- पहेलियां बूझना
44- सूई का काम यानी कपड़ों की सिलाई, रफू,   कसीदाकारी करना।
45 – बालों की सफाई का कौशल
46- मुट्ठी की चीज या मनकी बात बता देना
47- कई देशों की भाषा का ज्ञान
48 – मलेच्छ-काव्यों का समझ लेना – ऐसे संकेतों को लिखने व समझने की कला जो उसे जानने वाला ही समझ सके।
49 – सोने, चांदी आदि धातु तथा हीरे-पन्ने आदि रत्नों की परीक्षा
50 – सोना-चांदी आदि बना लेना
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कृष्ण जन्माष्टमी 2025 - फोटो : Adobe Stock
51 – मणियों के रंग को पहचानना
52- खानों की पहचान
53- चित्रकारी
54- दांत, वस्त्र और अंगों को रंगना
55- शय्या-रचना
56- मणियों की फर्श बनाना यानी घर के फर्श के कुछ हिस्से में मोती, रत्नों से जड़ना।
57- कूटनीति#शास्त्र_संस्कृति_प्रवाह||
58- ग्रंथों को पढ़ाने की चातुराई
59- नई-नई बातें निकालना
60- समस्यापूर्ति करना
61- समस्त कोशों का ज्ञान
62- मन में कटक रचना करना यानी किसी श्लोक आदि   में छूटे पद या चरण को मन से पूरा करना।
63-छल से काम निकालना
64- शंख, हाथीदांत सहित कई तरह के कान के गहने तैयार करना।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
 
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