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Janmashtami 2024: बाल गोपाल को मोरमुकुटधारी क्यों कहा जाता है, क्यों सजता है उनके मुकुट में मोरपंख?

Fri, 23 Aug 2024 06:51 AM IST
शिखर बरनवाल धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Krishna Janmashtami 2024: मोर और सांप की दुश्मनी है। यही वजह है कि कालसर्प योग में मोर पंख को साथ रखने की सलाह दी जाती है। कालसर्प दोष का प्रभाव करने के लिए भी भगवान कृष्ण मोरपंख को सदा साथ रखते थे।
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Janmashtami 2024 - फोटो : अमर उजाला
Janmashtami 2024: हिंदू पंचाग के अनुसार हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्वस के रूप में कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। इस वर्ष 26 अगस्त 2024 को श्री कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इस दिन बहुत से लोग भगवान कृष्ण की मूर्ति को घर में लाकर पूजा करते हैं। धार्मिक ग्रंथों में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी कई लीला और मान्यताएं हैं। अक्सर आपने देखा होगा भगवान श्री कृष्ण अपने मुकुट में मोर पंख लगाते थे, इस कारण से कृष्ण भगवान को मोर मुकुटधारी भी कहा जाता है। साथ ही आपने यशोदा माता को कान्हा कहते हुए सुना होगा। माता यशोदा कान्हा का खूब शृंगार करती थीं और उनके मुकुट पर हमेशा मोर पंख का लगाती थीं। इसलिए आइए इस लेख में प्रचलित कथाओं के माध्यम से जानते हैं कि कान्हा के मुकुट पर हमेशा मोर पंख क्यों सजा होता है?
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Janmashtami 2024 - फोटो : अमर उजाला
जब मोर को दिया आश्वासन
धार्मिक कथा के मुताबिक, जब भगवान विष्णु ने त्रेता युग में श्रीराम के रूप में अवतार लिया और जब श्रीराम अपनी पत्नी सीता व भाई लक्ष्मण सहित 14 वर्ष के लिए वनवास गए थे। तभी वन में सीता को रावण हर कर ले गया था। तब राम और लक्ष्मण सीता को खोजते हुए वन वन भटक रहे थे और सभी से सीता का पता पूछ रहे थे कि क्या उन्होंने सीता को कहीं देखा है? तब एक मोर ने कहा कि प्रभु मैं आपको रास्ता बता सकता हूं कि रावण सीता माता को किस ओर ले गया है, पर मैं आकाश मार्ग से जाऊंगा और आप पैदल।
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बाल गोपाल के अनेक नाम - फोटो : Instagram
मगर आप रास्ता भटक सकते हैं इसलिए मैं अपना एक एक पंख गिराता हुआ जाऊंगा जिससे आप रास्ता ना भटके और इस तरह मोर ने श्री राम को रास्ता बताया परंतु अंत में वह मरणासन्न हो गया क्योंकि मोर के पंख एक विशिष्ट मौसम में अपने आप ही गिरते हैं ,अगर इस तरह जानबूझ के पंख गिरे तो उसकी मृत्यु हो जाती है। श्रीराम ने उस मोर को कहा कि वे इस जन्म में उसके इस उपकार का मूल्य तो नहीं चुका सकते परंतु अपने अगले जन्म में उसके सम्मान में पंख को अपने मुकुट में धारण करेंगे और इस तरह श्रीकृष्ण के रूप में विष्णु ने जन्म लिया और अपने मुकुट में मोर पंख को धारण किया।
 

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Janmashtami 2024 - फोटो : अमर उजाला
ब्रह्मचर्य का प्रतीक है मोर
श्रीकृष्ण के मोर पंख धारण करने के पीछे एक प्रचलित कहानी है कि मोर ही सिर्फ ऐसा पक्षी है, जो जीवन भर ब्रह्मचर्य रहता है। ऐसा कहा जाता है कि मादा मोर नर मोर के आंसू पीकर गर्भ धारण करती है। इस प्रकार श्री कृष्ण ऐसे पवित्र पक्षी के पंख को अपने माथे पर सजाते हैं।
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Janmashtami 2024 - फोटो : अमर उजाला
श्रीकृष्ण को था कालसर्प योग
ज्योतिष मान्यता के अनुसार भगवान श्री कृष्ण की कुंडली में कालसर्प योग था। मोर और सांप की दुश्मनी है। यही वजह है कि कालसर्प योग में मोर पंख को साथ रखने की सलाह दी जाती है। कालसर्प दोष का प्रभाव करने के लिए भी भगवान कृष्ण मोरपंख को सदा साथ रखते थे।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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