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Krishna Janmashtami 2023: सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, जानिए पूजा विधि और महत्व

Wed, 06 Sep 2023 06:38 AM IST
आशिकी पटेल पं.मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य
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सर्वार्थसिद्धि योग में मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, जानिए पूजा विधि और महत्व - फोटो : iStock
Krishna Janmashtami 2023 Shubh Yoga: हिंदू धर्म में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस विशेष दिन पर रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण की उपासना करने से साधक को विशेष लाभ प्राप्त होता है।

प्रतिवर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला श्रीकृष्ण जन्माष्टमी इस बार बेहद खास माना जा रहा है। पुराणों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि व्यापनी अष्टमी तिथि और रोहणी नक्षत्र में हुआ था। इस वर्ष 6 सितम्बर को सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है और चंद्रमा वृषभ राशि, रोहिणी नक्षत्र, बुधवार  होने से एक विशेष योग 30 सालों बाद निर्मित हो रहा है। इसीलिए इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी सुख, समृद्धि और मनोवांछित फल देने वाली मानी जा रही है।

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सर्वार्थसिद्धि योग में मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, जानिए पूजा विधि और महत्व - फोटो : iStock
अष्टमी तिथि पर मध्य रात्रि रोहिणी का शुभ नक्षत्र
ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मध्य रात्रि में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है और सर्वार्थ सिद्धि योग निर्मित हो रहा है। रोहिणी नक्षत्र 6 सितम्बर की सुबह 9.20 से 7 सितम्बर को सुबह 10. 25 तक रहेगा। रोहिणी को चंद्रमा की पत्नी माना जाता है और इस दिन चंद्रमा अपने उच्च अंश वृषभ राशि में होगा। ग्रहों की यह दशा पूजन अर्चन के योग से विशेष फलदायी सिद्ध हो रही है। सर्वार्थ सिद्धि योग में की गई पूजन अर्चना भक्तों को विशेष फल देगी।
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सर्वार्थसिद्धि योग में मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, जानिए पूजा विधि और महत्व - फोटो : iStock
गृहस्थ कब मनाएं जन्माष्टमी?
गृहस्थ जीवन वालों के लिए 06 सितंबर को जन्माष्टमी का त्योहार मनाना शुभ रहेगा। इस दिन रोहिणी नक्षत्र व अष्टमी तिथि का भी शुभ मुहूर्त बन रहा है। बाल गोपाल का जन्म मध्य रात्रि को हुआ था। 

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सर्वार्थसिद्धि योग में मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, जानिए पूजा विधि और महत्व - फोटो : iStock
स्मार्त संप्रदाय और वैष्णव संप्रदाय के लोग अलग-अलग दिन इसलिए जन्माष्टमी मनाते हैं, क्योंकि दोनों संप्रदाय के लोग पंचांग में बताए अलग-अलग समय पर इस पर्व को मनाते हैं। स्मार्त संप्रदाय उदया तिथि को इतना महत्व नहीं देते हैं। जबकि वैष्णव संप्रदाय उदयकाल पर निर्धारित समय को मानता है। स्मार्त जन यदि अर्ध्दरात्रि को अष्टमी पड़ रही हो तो उसी दिन जन्माष्टमी मनाते हैं। जबकि वैष्णव संन्यासी उदया तिथि जन्माष्टमी मनाते हैं एवं व्रत भी उसी दिन रखते हैं।

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सर्वार्थसिद्धि योग में मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, जानिए पूजा विधि और महत्व - फोटो : iStock
कैसे करें श्रीकृष्ण की आराधना?
इस वर्ष विशेष ग्रह नक्षत्र में होने की वजह से जन्माष्टमी को काफी शुभ माना जा रहा है। साधना करने के लिये श्रीकृष्ण के भक्तों के लिये यह बहुत महत्वपूर्ण समय है। वैसे तो हर जन्माष्टमी शुभ होती है और श्रीकृष्ण भक्तों के सारे दुख हर लेते हैं। लेकिन अगर आप विशेष काल और नक्षत्र में भजन कीर्तन के साथ श्रीकृष्ण कथा और लीला अमृत का पाठ करते हैं तो इससे भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होंगे और सुख समृद्धि तथा सफलता का आशीर्वाद देंगे।
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सर्वार्थसिद्धि योग में मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, जानिए पूजा विधि और महत्व - फोटो : iStock
पूजा मुहूर्त व विधि
अष्टमी तिथि बुधवार 6 सितंबर को दोपहर 3.37 बजे से प्रारंभ होकर 7 सितंबर को शाम 4.14 बजे समाप्त होगी। जन्माष्टमी पूजन का शुभ मुहूर्त रात्रि 11.44 बजे से 12.29 बजे तक रहेगा। इस मुहूर्त में लड्डू गोपाल की पूजा अर्चना की जाती है। जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण का शृंगार करने के बाद उन्हें अष्टगंध, चन्दन, अक्षत और रोली का तिलक लगाकर माखन मिश्री और अन्य भोग सामग्री अर्पित करना शुभ माना गया है।

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