रामायण में भगवान राम ने रावण का वध किया और रावण का वध होते ही असत्य पर सत्य की जीत हो गई। रामायण में एक से बढ़कर एक योद्धा हुए। आज हम आपको ऐसे ही एक योद्धा के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके पास अनेकों शक्तियां थी। आइए, जानते हैं उस योद्धा के बारे में जिसकी शक्तियां देख स्वंय भगवान राम भी हतप्रभ रह गए थे....
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रावण
- फोटो : Social media
रावण का पुत्र मेघनाद
रावण का पुत्र मेघनाद बहुत ही शक्तिशाली और एक महान योद्धा था। मेघनाद की माता मंदोदरी थी। आइए, आज जानते हैं मेघनाद के बारे में सबकुछ....
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मेघनाद का जन्म
रावण को एक तेजस्वी बेटे की चाहत थी, जो सबसे अधिक शक्तिशाली हो। धार्मिक कथाओं के अनुसार रावण ने अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए अपने ज्ञान से सभी ग्रहों को ऐसे स्थान पर बैठाया जिससे उसकी ये चाहत पूरी हो सके।
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शुक्राचार्य
- फोटो : social media
शुक्राचार्य ने सिखाई तमाम विद्याएं
मेघनाद ने शिक्षा असुरों के गुरु शुक्राचार्य से ग्रहण की थी। शुक्राचार्य ने मेघनाद को कई देवअस्त्रों का ज्ञान दिया था।
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इंद्र
देवराज इंद्र को हराया
मेघनाद ने अपने बल के दम पर अकेले ही देवराज इंद्र को हराकर बंदी बना लिया था। मेघनाद इंद्र को बंदी बनाकर लंका में ले आया था।
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ब्रह्मदेव ने दिया वरदान
जब मेघनाद ने देवराज इंद्र को बंधी बना लिया तब ब्रह्मा जी ने मेघनाद से इंद्र को छोड़ने को कहां और बदले में कोई भी मनवांछित वरदान देने का आश्ववासन दिया। मेघनाद ने इंद्र को छोड़ने के बदले अमरता का वरदान मांगा। ब्रह्मा जी ने इसे सृष्टि के नियम के खिलाफ बताया और इसके समान ही यह वरदान दिया कि तुम्हें युद्ध में कोई नहीं हरा पाएगा, बस उसके लिए तुम्हें अपनी कुलदेवी का हवन करना होगा। अगर तुम ऐसा करने में सफल हुए तो तुम्हें युद्ध में कोई भी नहीं हरा पाएगा।
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भगवान राम और लक्ष्मण जी को नागपाश से किया बेहोश
मेघनाद ने अपनी मायावी शक्तियों से भगवान राम और लक्ष्मण जी को भी बेहोश कर दिया था। तब हनुमान जी गरुड़ पक्षी को लेकर आएं और गरुड़ ने इस शस्त्र के असर को काट दिया।
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लक्ष्मण जी को मारी शक्ति
मेघनाद ने अपनी मायावी शक्तियों से लक्ष्मण जी को बेहोश कर दिया था, तब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेकर आए और लक्ष्मण जी की मूर्छा दूर हुई।
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आज्ञाकारी पुत्र
मेघनाद इस बात को जान गया था, कि वो युद्ध नहीं जीत सकते हैं, क्योंकि श्री राम साधारण पुरुष नहीं हैं। इस बात को उसने रावण को बताया और उनकी शरण में जाने का सुझाव भी दिया, परंतु रावण नहीं माना। मेघनाद चाहता तो वो भगवान की शरण में चला जाता, परंतु उसने अपने पिता का साथ नहीं छोड़ा।
ब्रह्मा जी के वरदान को सिद्ध करने के लिए मेघनाद अपनी कुलदेवी का हवन कर रहा था। अगर वो हवन पूरा हो जाता तो मेघनाद को हराना नामुमकिन हो जाता। परंतु उससे पूर्व ही लक्ष्मण जी ने उसका वध कर दिया।