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अगर जा रहे हैं तीर्थयात्रा तो इन महत्वपूर्ण बातों को जानना है बेहद जरूरी

Tue, 22 Dec 2020 07:37 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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प्रतीकात्मक तस्वीर
हर धर्म के तीर्थस्थल होते हैं। जहां पर व्यक्ति जाकर व्यक्ति आत्मिक शांति का अनुभव करता है। हिंदू धर्म के भी अनेको-अनेक तीर्थ स्थल हैं। इस स्थानों की तीर्थयात्रा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी माना जाता है। तीर्थयात्रा करने का महत्व वेदों और पुराणों में भी माना गया है। हम सभी के तीर्थयात्रा करने का मुख्य उद्देश्य ईश्वर के करीब रहने की अनुभूति करना और पुण्य प्राप्त करना होता है, इसलिए तीर्थयात्रा करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है, तभी आपको यात्रा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। तो चलिए जानते हैं कि किन बातों को ध्यान में रखना है आवश्यक...
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प्रतीकात्मक तस्वीर
  • यदि आप तीर्थयात्रा करने जा रहे हैं तो यात्रा करते समय कभी भी झूठ या अपशब्द न बोलें। तीर्थयात्रा के समय और तीर्थस्थल पर कोई भी गलत कार्य न करें, क्योंकि तीर्थ पार जाने से व्यक्ति के पापकर्म नष्ट होते हैं परंतु तीर्थस्थल पर किए गए पापकर्म कभी नष्ट नहीं होते हैं।
  • तीर्थस्थल पर जाकर आत्मिक शांति को प्राप्त करने का समय होता है। इसलिए तीर्थ स्थल पर तेज-तेज बातें करना बिना बात के हंसी ठिठोली करना जैसे कार्य न करें। इससे आपके साथ दूसरे लोगों की साधना में भी व्यवधान पड़ता है।
  • हमेशा ही भगवान का ध्यान करने के बाद ही भोजन करना चाहिए, लेकिन जब आप यात्रा पर हैं तो भगवान के निवेदित किए बिना किसी भी चीज का सेवन न करें।
     
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
  • तीर्थयात्रा पर जाएं तो किसी भी प्राकृतिक चीज को नुकसान न पहुंचाएं। 
  • आवश्यकता के बिना पेड़-पौधो से फल-फूल पत्ते आदि न तोड़ें।
  • किसी भी देवस्थान पर जाकर परिक्रमा करते समय भगवान के सामने कुछ देर रूककर परिक्रमा करें।
  • भगवान के श्रीविग्रह के सामने पैर पसारकर नहीं बैठना चाहिए और न ही तेज से बोलना चाहिए।
  • भगवान के दर्शन करते समय हंसी-मजाक में भी अश्लील शब्दों का प्रयोग न करें। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Facebook/Beauty Of India
ऐसे मिलता है यात्रा का फल
  • तीर्थस्थल पर जाने पर मनुष्य को स्नान, दान, जप आदि पुण्य कर्म अवश्य करने चाहिए। 
  • तीर्थ हमेशा अपने धन से करना चाहिए। दूसरों के धन से किए गए तीर्थ के पुण्य का सोहलवां भाग प्राप्त होता है। 
  • तीर्थ यात्रा करने पर अपने आचार-विचार संस्कार, आहार  व्यव्हार में शुद्धता रखनी चाहिए तभी आपको यात्रा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
  • जो लोग माता-पिता अपने बड़े-बुजुर्गो और गुरूजनों का आदर नहीं करते हैं तो उन्हें तीर्थयात्रा का कभी फल नहीं मिलता है। 
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