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चाणक्य नीति: ये चार अवस्थाएं मनुष्य के लिए होती हैं विष के समान, करना चाहिए सुधार

Tue, 22 Dec 2020 03:28 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य राजनीति कूटनीति समेत कई विषयों के कुशल विद्वान थे। उन्होंने अपनी नीतियों और बुद्धि के बल से ही छोटी सी आयु में ही चंद्रगुप्त मौर्य को सम्राट के रूप में स्थापित किया। आचार्य चाणक्य ने वैसे तो कई शास्त्र लिखें लेकिन उनके द्वारा लिखे गए नीतिशास्त्र की बातें लोगों में बहुत लोकप्रिय हैं। इन बातों को यदि कोई मनुष्य अपने जीवन में भली प्रकार से अनुकरण करे तो अपने जीवन को सफल और सुखमय बना सकता है। चाणक्य ने नीतिशास्त्र में ऐसी चार अवस्थाओं के बारे में बताया है, जो मनुष्य के लिए विष के समान होती हैं। इनमें सुधार करना चाहिए। 

 
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
शरीर को स्वस्थ रखने और जीवन के लिए लिए भोजन आवश्यक है, स्वादिष्ट भोजन हर किसी को पसंद होता है परंतु अपनी भूख और पाचन शक्ति के अनुसार ही भोजन करना चाहिए। चाणक्य नीति कहती है कि क्षमता से अधिक भोजन जो पाचाया न जा सके तो यह अवस्था व्यक्ति के लिए विष के समान हो जाती है। इसलिए व्यक्ति को इसमें सुधार करना चाहिए।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
चाणक्य नीति के अनुसार गरीबी व्यक्ति के लिए विष के समान है। कहने का तात्पर्य यह है कि जब मनुष्य की आर्थिक स्थिति मजबूत न हो वह गरीब,दरिद्र हो तो शादी और घर जैसे भार व्यक्ति को विष के समान लगते हैं। छोटी-छोटी चीजों को प्राप्त करने के लिए भी व्यक्ति को बहुत संघर्ष करना पड़ता है। इसलिए आचार्य चाणक्य के मुताबिक इस स्थिति में सुधार के प्रयास करते रहने चाहिए।

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Chanakya Success Mantra - फोटो : social media
वृद्धवस्था एक ऐसी अवस्था है जब व्यक्ति के पास पूरे जीवन का अनुभव होता है। जिससे वह समाज को सही राह दिखा सकता है। वृद्धावस्था में जो व्यक्ति दान-पुण्य धार्मिक कार्य और समाजहित के कार्य को त्यागकर प्रेम प्रसंग में फंस जाता है तो यह अवस्था विष के समान हो जाती है। इससे व्यक्ति के धन, सम्मान सभी चीजों का नाश हो जाता है।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
चाणक्य नीति के अनुसार ज्ञान का दोहराव बहुत आवश्यक होता है क्योंकि निरंतर अभ्यास से ही व्यक्ति पारंगत बनता है। अभ्यास न करने की अवस्था में वो ज्ञान विष समान हो जाता है। 
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