आचार्य चाणक्य
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शरीर को स्वस्थ रखने और जीवन के लिए लिए भोजन आवश्यक है, स्वादिष्ट भोजन हर किसी को पसंद होता है परंतु अपनी भूख और पाचन शक्ति के अनुसार ही भोजन करना चाहिए। चाणक्य नीति कहती है कि क्षमता से अधिक भोजन जो पाचाया न जा सके तो यह अवस्था व्यक्ति के लिए विष के समान हो जाती है। इसलिए व्यक्ति को इसमें सुधार करना चाहिए।