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Jagannath Rath Yatra 2022: आखिर क्यों पुरी के भगवान जगन्नाथ की मूर्तियां रह गईं अधूरी? जानिए क्या है पौराणिक मान्यता

Fri, 01 Jul 2022 10:54 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली
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क्यों अधूरी है पुरी के भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा - फोटो : Amar Ujala
Jagannath Puri Temple Facts: उड़ीसा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर भारत के चार पवित्र धामों में से एक है। यहां हर साल आषाढ़ में भव्य रथयात्रा निकाली जाती है। इस रथयात्रा में देश के कोने-कोने से लोग पहुंचते हैं। जगन्नाथ मंदिर में भगवान कृष्ण ही जगन्नाथ के नाम से विराजमान हैं। यहां उनके साथ उनके ज्येष्ठ भ्राता बलराम और बहन सुभद्रा भी हैं। आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को शुरू होने वाली रथयात्रा में रथ को किसी मशीन या जानवर के द्वारा नहीं बल्कि भक्तों द्वारा खींचा जाता है। पुरी में भगवान जगन्नाथ के अलावा बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा की प्रतिमाएं काष्ठ की बनी हुई हैं। ताज्जुब की पहली बात ये कि तीनों की प्रतिमाएं अधूरी हैं और दूसरा ताज्जुब ये कि मंदिर की कोई परछाई नहीं बनती। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों ये मूर्तियां अधूरी रह गईं और क्यों जगन्नाथ भगवान की अधूरी मूर्ति की पूजा की जाती है... 
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क्यों अधूरी है पुरी के भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा - फोटो : iStock
भगवान जगन्नाथ की मूर्ति क्यों है अधूरी?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा इंद्रद्युम्न पुरी में मंदिर बनवा रहे थे तो भगवान जगन्नाथ की मूर्ति बनाने का कार्य उन्होंने देव शिल्पी विश्वकर्मा को सौंपा। 
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क्यों अधूरी है पुरी के भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा - फोटो : iStock
मूर्ति बना रहे भगवान विश्वकर्मा ने राजा इंद्रद्युम्न के सामने शर्त रखी कि वे दरवाजा बंद करके मूर्ति बनाएंगे और जब तक मूर्तियां नहीं बन जाती तब तक अंदर कोई प्रवेश नहीं करेगा। यदि दरवाजा किसी भी कारण से पहले खुल गया तो वे मूर्ति बनाना छोड़ देंगे। 

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क्यों अधूरी है पुरी के भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा - फोटो : iStock
बंद दरवाजे के अंदर मूर्ति निर्माण कार्य हो रहा है या नहीं, ये जानने के लिए राजा प्रतिदिन दरवाजे के बाहर खड़े होकर मूर्ति बनने की आवाज सुनते थे। एक दिन राजा को अंदर से कोई आवाज सुनाई नहीं दी तो उनको लगा कि विश्वकर्मा काम छोड़कर चले गए हैं। इसके बाद राजा ने दरवाजा खोल दिया। 
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क्यों अधूरी है पुरी के भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा - फोटो : iStock
इसके बाद  भगवान विश्वकर्मा वहां से अंतर्ध्यान हो गए और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां अधूरी ही रह गईं। उसी दिन से आज तक मूर्तियां इसी रूप में यहां विराजमान हैं। और आज भी भगवान की पूजा इसी रूप होती है।
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क्यों अधूरी है पुरी के भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा - फोटो : PTI
आज भी पूरे श्रद्धा भाव से होती है पूजा 
वैसे तो हिंदू धर्म में खंडित या अधूरी मूर्ति की पूजा करना अशुभ माना जाता है, लेकिन हिंदुओं के चार धामों में से एक पुरी के जगन्नाथ धाम की मूर्तियां अधूरी हैं। इसके बावजूद भी पूरी श्रद्धा के साथ पूजा की जाती है। मान्यता है कि तीनों देवों के प्रति आस्था और विश्वास भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये खबर लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस खबर में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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