महापुरुषों ने की हैं अलग-अलग तरीके से व्याख्याएं
गीता के सन्देश को जनसामान्य के लिए बोधगम्य बनाने के लिए आदिशंकराचार्य, रामानुजाचार्य, चैतन्य महाप्रभु, भास्कराचार्य, वल्लभाचार्य, मध्वाचार्य, बालगंगाधर तिलक, महात्मा गांधी, विनोबा भावे जैसे मूर्धन्य विद्वानों ने व्याख्याएं की हैं। इन व्याख्याओं से गीता को आधुनिक सन्दर्भों में प्रासंगिक बनाने में मदद मिली है। गीता के इन भाष्यों से इसके अनुशीलकों को नई प्रेरणा और जीवनदृष्टि मिलती है चाहे वे वैज्ञानिक, मनस्विद, राजनीतिज्ञ, संन्यासी, दार्शनिक, शिक्षक या विद्यार्थी कोई भी हों। परमपिता परमात्मा से प्रार्थना है कि वे हमें इस महान उपदेश से अपने जीवन को सफल और सार्थक बनाने का आशीर्वाद प्रदान करें।
— लेखक एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा में संस्कृत के प्रवक्ता हैं।