हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को बहुत ही पवित्र और शुभ माना गया है। लगभग सभी तरह की पूजा और अनुष्ठान में तुलसी के पत्तों का प्रयोग जरूर किया जाता है। जहां एक तरफ धार्मिक नजरिए से तुलसी का पौधा अत्यंत ही पूजनीय होता है, तो वहीं इस पौधे में कई औषधीय गुणों का भंडार होता है। इसी कारण से हर घर में तुलसी का पौधा जरूर होता है। वास्तु शास्त्र के नजरिए से भी तुलसी का पौधा घर पर होने से हमेशा सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती रहती है। भगवान विष्णु समेत अन्य देवी-देवताओं को भी तुलसी के पत्ते बेहद ही प्रिय होती है। बिना तुलसी पत्र के देवी-देवताओं की पूजा अधूरी मानी जाती है। शास्त्रों में तुलसी के पौधे लगाने और इसके पत्तों को तोड़ने के कुछ नियम बताए गए हैं जिसका पालन अवश्य ही करना चाहिए।
तुलसी के पत्ते और नियम
- शास्त्रों में बताया गया है कि जब भी अमावस्या, द्वादशी और चतुर्दशी की तिथि आए तो इस दिन भूलकर भी तुलसी के पत्तों को नहीं तोड़ना चाहिए।
- इसके अलावा रविवार के दिन भी तुलसी पत्र नहीं तोड़ना चाहिए। माना जाता है कि इस दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने पर पूजा का पूरा फल प्राप्त नहीं होता है
- तुलसी के पत्तों को तोड़ते समय विशेष सावधानी रखनी चाहिए। कभी भी नाखून का प्रयोग करते हुए तुलसी के पत्ते न तोड़ें, बल्कि हमेशा उंगलियों के पोरों की मदद से ही पत्ते तोड़ने चाहिए।