भगवान शिव के प्रिय मास में काफी व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं। 11 अगस्त,बुधवार को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं पति के लिए उपवास रखकर शिव-गौरी का पूजन-वंदन कर झूला झूलती है और सुरीले स्वर में सावन के गीत-मल्हार गाती हैं। इस दिन सुंदर चूड़ियां,वस्त्र पहनने, सोलह श्रृंगार करने का विशेष महत्व है। दरअसल जिन बातों को हम रिवाज या परंपरा मानकर निभाते हैं,असल में तो उन बातों में कोई न कोई वैज्ञानिक कारण अवश्य ही छिपा होता है। जैसे कि हमारे भारतीय समाज में सदियों से ही तीज-त्योहार पर स्त्रियों को आभूषण पहनने पर जोर दिया जाता रहा है, ताकि आभूषणों के द्वारा नारी की सुंदरता में तो चार चाँद लगे ही साथ ही इनको पहनने से सेहत भी चुस्त-दुरुस्त रह सके।
मन को रिलैक्स करे बिंदिया
माथे पर जिस तरह महिलाएं बिंदी या कुमकुम लगाती हैं वही स्थान आज्ञा चक्र कहलाता है। यहीं से ही हमारे शरीर की प्रमुख नसें एक-दूसरे को काटती हैं। हिन्दू पौराणिक कथाओं में भगवान शिव का तीसरा नेत्र भी इसी जगह निहित है। एक्यूप्रेशर सिद्धांत के अनुसार यह वह बिंदु है जिसे दबाकर तत्काल कई परेशानियों से निजात पाया जा सकता है। इस पॉइंट पर बिंदी लगाने से तनाव कम होकर शांति मिलती है।