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Hariyali Teej 2021: हरियाली तीज आज, जानिए तीज-त्योहार पर श्रृंगार करने के पीछे का महत्व

Wed, 11 Aug 2021 07:07 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद
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हरियाली तीज 2021: अधिकांश सुहागिन स्त्रियां पैरों की उँगलियों में बिछिया पहनती हैं। यह गहना सिर्फ विवाहित होने की निशानी ही नहीं अपितु इसको पहनने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। - फोटो : Social media
भगवान शिव के प्रिय मास में काफी व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं। 11 अगस्त,बुधवार को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं पति के लिए उपवास रखकर शिव-गौरी का पूजन-वंदन कर झूला झूलती है और सुरीले स्वर में सावन के गीत-मल्हार गाती हैं। इस दिन सुंदर चूड़ियां,वस्त्र पहनने, सोलह श्रृंगार करने का विशेष महत्व है। दरअसल जिन बातों को हम रिवाज या परंपरा मानकर निभाते हैं,असल में तो उन बातों में कोई न कोई वैज्ञानिक कारण अवश्य ही छिपा होता है। जैसे कि हमारे भारतीय समाज में सदियों से ही तीज-त्योहार पर स्त्रियों को आभूषण पहनने पर जोर दिया जाता रहा है, ताकि आभूषणों के द्वारा नारी की सुंदरता में तो चार चाँद लगे ही साथ ही इनको पहनने से सेहत भी चुस्त-दुरुस्त रह सके।

मन को रिलैक्स करे बिंदिया
माथे पर जिस तरह महिलाएं बिंदी या कुमकुम लगाती हैं वही स्थान आज्ञा चक्र कहलाता है। यहीं से ही हमारे शरीर की प्रमुख नसें एक-दूसरे को काटती हैं। हिन्दू पौराणिक कथाओं में भगवान शिव का तीसरा नेत्र भी इसी जगह निहित है। एक्यूप्रेशर सिद्धांत के अनुसार यह वह बिंदु है जिसे दबाकर तत्काल कई परेशानियों से निजात पाया जा सकता है। इस पॉइंट पर बिंदी लगाने से तनाव कम होकर शांति मिलती है।
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teej - फोटो : अमर उजाला
सेहत संवारे पायल
आयुर्वेद में सिर ठंडा और पैर गरम होने की बात कही गई है अतः सिर पर सोना और पैरों में चांदी पहनना ही उचित बताया गया है इसलिए पायल हमेशा चांदी की ही पहननी चाहिए। सोने की पायल शारीरिक गर्मी का संतुलन खराब करके रोग उत्पन्न कर सकती है। पायल की छनक से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। पैरों में पायल की लगातार रगड़ से हड्डियों को मज़बूती मिलती है एवं यह शरीर के निचले हिस्सों में वसा बढ़ने से भी रोकती है।

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hariyali teej - फोटो : amar ujala
नर्वस सिस्टम को ठीक रखे बिछियां
अधिकांश सुहागिन स्त्रियां पैरों की उँगलियों में बिछिया पहनती हैं। यह गहना सिर्फ विवाहित होने की निशानी ही नहीं अपितु इसको पहनने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। दोनों पैरों में बिछियां पहनने से महिलाओं का हार्मोनल सिस्टम सुचारु रूप से कार्य करता है। एक्यूप्रेशर पद्धति के अनुसार बिछिया पहनने से शरीर के निचले अंगों के तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियां मजबूत रहती हैं। चांदी बिजली की अच्छी संवाहक होने के कारण धरती से प्राप्त होने वाली ऊर्जा को अपने अंदर ग्रहण कर पूरे शरीर तक पहुंचाती है जिससे महिलाएं तरोताजा महसूस करती हैं।

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teej
चूड़ी की खनखन मिटाए थकान
भारत में सुहागिनों के लिए चूड़ियां पहनना शुभ शगुन माना जाता है। चूड़ी, कलाई की त्वचा से घर्षण करके हाथों में रक्त संचार को बढ़ाती है। बार-बार त्वचा से चूड़ी की रगड़ लगकर ऊर्जा उत्पन्न होती है जो कि महिलाओं को थकान से बचाए रखती है। कलाई में इन्हें पहनने से श्वास रोग, हृदय रोग की संभावना कम हो जाती है। चटकी और बदरंग चूड़ियां पहनना अशुभ माना जाता हैं। चूड़ियों की खनखन से आस-पास सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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teej
प्यार का प्रतीक मंगलसूत्र
मंगलसूत्र पति-पत्नी के रिश्ते को जोड़ने का अटूट बंधन है। नाज़ुक से मंगलसूत्र की पकड़ बहुत मज़बूत होती है। अनेक शोधों से स्पष्ट हुआ है कि मंगलसूत्र पहनने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है। हिन्दू धर्म में मंगलसूत्र को छिपाकर पहनने की सलाह दी गई है। इसके पीछे तर्क यह है कि इस प्रेम की डोर को शरीर से स्पर्श कराना चाहिए ताकि उसका अधिक से अधिक लाभ मिल सके।
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