आज भाद्रमास की तृतीया तिथि है साथ ही आधे दिन के बाद चर्तुर्थी तिथी भी है इसलिए आज तीज और चौठ दोनों पर्व मनाया जाएगा। यहां हम बात कर रहे हैं हरितालिका तीज की जिनका महिलाओं के लिए बड़ा ही महत्व है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह तीज महिला क्यों रखती हैं। आइये जानें उन पांच कारणों को जिनकी वजह से यह व्रत रखा जाता है।
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हरितालिका तीज विशेषः इन पांच कारणों से मनाते हैं हरितालिका तीज
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हरितालिका तीज का पहला कारण यह है कि इस तीज के दिन देवी पार्वती अपनी सखियों के सहयोग से वन में पहुंचकर शिव को पति रुप में पाने के लिए व्रत का अनुष्ठान किया था। महल में पार्वती के नहीं होने पर पर्वतराज हिमालय और माता मैना को यह लगा कि देवी पार्वती का अपहरण हो गया है। इसलिए यह तिथि हरितालिका के नाम से जानी गई। देवी पार्वती का व्रत आरंभ और पार्वती के हरण के प्रसंग के कारण यह व्रत किया जाता है।
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व्रत के प्रभाव से भगवान शिव प्रकट हुए और देवी पार्वती को पत्नी रुप में स्वीकार करने का वरदान मिला। देवी पार्वती और भगवान शिव ने कहा कि जो कन्या इस व्रत को रखेगी उसे मनोनुकूल पति प्राप्त होगा इसलिए इस व्रत को कुंवारी कन्या भी रखती है।
हरितालिका तीज विशेषः इन पांच कारणों से मनाते हैं हरितालिका तीज
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शिव पुराण की कथा के अनुसार शुक्लपक्ष की तृतीया के दिन ही देवी पार्वती का अपने पूर्वजन्म में भगवान शिव से सती के रुप में विवाह हुआ था। इसलिए यह तिथि सौभाग्य प्रदान करने वाला माना गया है। यही कारण है कि देवी पार्वती ने अपने अगले जन्म में इसी तिथि को शिव को पुनः पाने का प्रयास किया था और सफल भी हुई थी।
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पुराणों की कथा के अनुसार देवी पार्वती ने कहा है कि जो सुहागन स्त्री इस व्रत को नियम पूर्वक रखती हैं उनका सुहाग सलामत रहता है।