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Hanuman Janmotsav: इन संतों को मिला है हनुमान जी का आशीर्वाद, जानें कलियुग में कैसे होंगे बजरंगबली के दर्शन?

Fri, 11 Apr 2025 09:57 AM IST
दीक्षा पाठक धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Hanuman Ji Ke Darshan Kaise Honge: हनुमान जी को कलियुग में भी अमर माना गया है। यह विश्वास मात्र नहीं, बल्कि अनुभव है उन संतों और भक्तों का, जिन्होंने समय-समय पर उनकी उपस्थिति को अनुभव किया है। तो आज की इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि किन संतों ने हनुमान जी की उपस्थिति को अनुभव किया है।
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हनुमान जन्मोत्सव 2025 - फोटो : freepik.com
बजरंगबली शक्ति, भक्ति और सेवा के प्रतीक माने जाते हैं। उनकी पूजा से व्यक्ति में हिम्मत, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हनुमान जन्मोत्सव हिंदू धर्म का एक सबसे पावन त्यौहार है, जो हनुमान जी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इस बार हनुमान जन्मोत्सव 12 अप्रैल को है। त्रेता युग में जन्मे हनुमान जी को चारों युगों के दाता भी कहा जाता है। त्रेता युग की लंका-विजय के नायक, राम भक्त, ब्रह्मचारी और शक्ति के प्रतीक हनुमान जी को कलियुग में भी अमर माना गया है। यह विश्वास मात्र नहीं, बल्कि अनुभव है उन संतों और भक्तों का, जिन्होंने समय-समय पर उनकी उपस्थिति को अनुभव किया है। तो आज की इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि किन संतों ने हनुमान जी की उपस्थिति को अनुभव किया है और आखिर कलियुग में आप हनुमान जी के दर्शन कैसे कर सकते हैं।
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हनुमान जन्मोत्सव 2025 - फोटो : Adobe
कलियुग में भी है हनुमान जी का प्रताप
कहते हैं कि हनुमान जी आज भी पृथ्वी पर निवास करते हैं। लेकिन उनकी उपस्थिति सामान्य दृष्टि से परे है। वे न तो राजमहलों में रहते हैं, न किसी गूंजते मंदिर में ही कैद हैं। वे वहां हैं, जहां राम का नाम है, जहां भक्ति की लौ मंद नहीं पड़ती और जहां आत्मा ईश्वर को पुकारती है। कुछ मान्यताएं कहती हैं कि चित्रकूट की शांत वनों में वे वास करते हैं, वहीं कुछ का विश्वास है कि हिमालय की गुफाओं में वे ध्यानरत हैं। रामेश्वरम् की लहरों में उनकी गूंज सुनाई देती है तो कुछ लोगों का कहना है कि वह गंधमादन पर्वत पर विराजमान हैं।
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हनुमान जन्मोत्सव - फोटो : freepik.com
कई संतों ने किए हैं दर्शन
इतिहास के पन्ने जब पलटे जाते हैं तो कुछ घटनाएं आंखों के सामने दिव्य प्रकाश की तरह उभर आती हैं। तुलसीदास जी जब वाराणसी की गलियों में भटक रहे थे, तब एक वृद्ध साधु के रूप में उन्हें मार्गदर्शन मिला और कहा जाता है कि वही साधु थे बजरंगबली। उन्हीं की कृपा से रामचरितमानस जैसा दिव्य ग्रंथ संसार को मिला।

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हनुमान जन्मोत्सव 2025 - फोटो : freepik
इन संतों ने शक्ति को किया है अनुभव
 स्वामी रामदास, जो शिवाजी महाराज के आध्यात्मिक गुरु बने, उन्होंने भी अपने जीवन में संकट के क्षणों में उस अदृश्य शक्ति को अनुभव किया, जिसने उन्हें अडिग बना दिया। नीम करौली बाबा के जीवन में तो जैसे हनुमान जी की आत्मा ही प्रवाहित होती थी। उनकी हर बात, हर कृपा, हर चमत्कार में एक अनकही उपस्थिति झलकती थी। इन संतों की तरह न जाने कितने साधक, योगी और तपस्वी हैं, जो पर्वतों, जंगलों और आश्रमों में उनका दर्शन पाकर मौन रह जाते है, क्योंकि ऐसी अनुभूति को शब्दों में पिरोना संभव नहीं।
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हनुमान जन्मोत्सव 2025 - फोटो : adobe stock
कलियुग में ऐसे कर सकते हैं हनुमान जी के दर्शन
पर क्या केवल संत ही उनके दर्शन पा सकते हैं? तो आपको बता दें कि ऐसा नहीं है। हनुमान जी की कृपा जात-पात, वेशभूषा से बंधी नहीं है। वे वहां प्रकट होते हैं, जहां भक्ति निस्वार्थ हो, मन निर्मल हो और हृदय में राम का नाम गूंजता हो। उनके दर्शन एक वरदान हैं, जो उन्हें ही मिलते हैं जो जीवन की अग्नि में तपकर खुद को ईश्वर को समर्पित कर देते हैं। 


 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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