लंका पर चढ़ाई के समय हनुमान ने कई बार इस सिद्धि का प्रयोग किया था। ईशित्व सिद्धि से कहते हैं कि व्यक्ति में ईश्वरत्व का वास हो जाता है यानी व्यक्ति में ईश्वर की शक्ति आ जाती है। इसी सिद्धि के कारण हनुमान जन-जन के आराध्य और पूज्य बन सके। आठवीं है, वशित्व सिद्धि। इस सिद्धि को प्राप्त करके किसी को भी अपने वश में किया जा सकता है। हनुमान जी ने अपनी इस सिद्धि से मन, वचन, कर्म से काम, क्रोध, मद, लोभ, दंभ, दुर्भाव, द्वेष, आवेश, राग-अनुराग सभी को अपने वश में कर लिया था। इन्हीं सिद्धियों ने हनुमान जी को महावीर बनाया था।