हज पर जाने का मक़सद क्या होता है?
इस्लाम के कुल पाँच स्तंभों में से हज पांचवां स्तंभ है। सभी स्वस्थ और आर्थिक रूप से सक्षम मुसलमानों से अपेक्षा होती है कि वो जीवन में एक बार हज पर ज़रूर जाएं।हज को अतीत के पापों को मिटाने के अवसर के तौर पर देखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि हज के बाद उसके तमाम पिछले गुनाह माफ़ कर दिए गए हैं और वो अपनी ज़िंदगी को फिर से शुरू कर सकता है। ज़्यादातर मुसलमानों के मन में जीवन में एक बार हज पर जाने की इच्छा होती है।
जो हज का ख़र्च नहीं उठा पाते हैं उनकी धार्मिक नेता और संगठन आर्थिक मदद करते हैं। कुछ मुसलमान तो ऐसे भी होते हैं जो अपनी ज़िंदगी भर की कमाई हज पर जाने के लिए बचाकर रखते हैं। दुनिया के कुछ हिस्सों से ऐसे हाजी भी पहुंचते हैं जो हज़ारों मील की दूरी महीनों पैदल चलकर तय करते हैं और मक्का पहुंचते हैं।